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23 Oct 2012

शादी के बाद भी न बुझी प्यास



मेरा नाम है परमजीत, मैं अमृतसर की रहने वाली हूँ, मेरा घर अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक गाँव में है, मेरी उम्र बीस साल है, मेरी शादी हो चुकी है लेकिन मैं अभी कंप्यूटर का दो साल का कोर्स कर रही हूँ।

वैसे तो मैं शुरु से मनचली और चंचल लड़की हूँ, मेरे घर का वातावरण अच्छा नहीं था क्योंकि मैं गाँव में जन्मी हूँ और वहीं पढ़ी हूँ, माँ को गैर मर्दों के साथ देख-देख मेरी कलि उम्र से पहले खिलने लगी, जब मैं स्कूल में थी तभी से मेरे उभारों का विकास शुरु हो गया था, देखते ही देख्ते समय से पहले मुझ पर जवानी का सैलाब आ गया, मुझे लगता कि मेरे अन्दर बाकी लड़कियों से कुछ अलग है। मेरा बदन तब से ही लड़कों को देख कर जलने लगा, जब भी नहाने लगती जब मेरा ध्यान मेरे उभारों पर जाता, मुझे कुछ कुछ होने लगता, जब अपने हाथ से वहाँ साबुन लगाती, मुझे अलग सी तरंग छिड़ती, लहर सी छाने लगती।

माँ तो माँ ! मेरी बड़ी बहन मनप्रीत मेरे से दो साल बड़ी है, इतना मुझे मालूम था कि स्कूल के एक सबसे गुंडा टाइप लड़के से उसका चक्कर ज़ोरों पर है, उसकी जवानी भी बहुत भयानक थी। हम दोनों माँ पर गईं थी।

फिर एक दिन माँ घर नहीं थी, उस दिन ऐन मौके पर उसने कहा- मेरे पेट में बहुत दर्द है, मैं स्कूल नहीं जा रही।

मैंने कहा- मैं भी रुक लेती हूँ !

लेकिन उसने कहा- नहीं, तू जा !

मुझे उस पर कुछ शक हुआ, लेकिन मैं चली गई, स्कूल गई और बीमारी का बहाना लगा वहाँ से छुट्टी लेकर जल्दी लौट आई।

मेन-गेट तो खुला था लेकिन एक कमरे का दरवाज़ा बंद था। मुझे यकीन था कि दीदी का इरादा नेक नहीं था, मैं पिछली खिड़की के पास गई, अन्दर का दृश्य देख मेरी खुद की कच्छी गीली होने लगी। दीदी पूरी नंगी हुई बिस्तर पर पड़ी थी और हमारे खेतों में काम करने वाले दोनों नौकर भी नंगे अपने अपने लौड़े दीदी के पास लेकर घुटनों के बल बैठे थे।

दीदी को अचानक क्या हुआ कि उसने एक का मुँह में ले लिया। दूसरा दीदी के मम्मे चूस रहा था। फिर दीदी ने बारी से दोनों से अपनी चूत मरवाई। वो चले गए, मेरी हालत पतली हो गई।

उसी दिन शाम को मैं खेतों की तरफ निकली और वहाँ उस वक़्त उनमें से एक ही था। मैंने बिना कुछ कहे पीछे से उसको जफ्फी डाल दी,

वो मुड़ा- तू?

हां ! क्यूँ ? बस दीदी से करेगा ? सुबह से तेरा वो मेरी आँखों के सामने घूम रहा है !

तू अभी छोटी है, तेरी लेकर मुझे मरना नहीं अभी ! तैयार हो जा ! चल वैसे तेरी मस्ती उतार देता हूँ !

वह मुझे वहीं घास पर लिटा मेरे मम्मे पीने लगा और मेरी चूत छेड़ने लगा, मैं सिसक रही थी।

वह बोला- इसमें मैं नहीं डालूँगा !

कोई बात नहीं ! तूने वैसे ही मुझे मस्त कर दिया !

उसके बाद से मेरे मम्मे तेज़ी से बढ़ने लगे। उसने दूसरे को बताया, फिर मौका देख दोनों मेरे मम्मे पीते, जिस्म से खेलते लेकिन चूत का जोखिम नहीं लेते।

फिर पूरी विकसत हो गई, एक दिन उनमें से एक ने आखिर मेरी सील तोड़ दी और उससे चुदवाने के बाद अभी मैंने कपड़े ठीक किये थे, माँ ने मुझे खेत से निकलते देख लिया। जब माँ ने मुझे फटकार लगाई घर आकर तो मेरे मुँह से अंदर का उबाल निकल आया- क्या करूँ - जैसी माँ वैसी बेटी निकलगी ना ! जब माहौल वैसा मिला, मुझसे जवानी नहीं संभलती !

माँ चुपचाप सुनती रही।

मैंने माँ को कह दिया- मेरी शादी करवा दे वरना मेरे से और भी गलत कदम उठ जायेंगे !

माँ को दीदी के बारे में भी सब पता चल गया था, दीदी की भी जल्दी शादी कर दी गई।

दसवीं की परीक्षा देते ही पास के गाँव में मेरा रिश्ता तय हो गया, मेरा रिश्ता गुरनाम सिंह नाम के किसान के बेटे के साथ हुआ, वो ज्यादा पढ़ा नहीं था लेकिन ज़मीन काफी थी, तीन भाई थे, एक जेठ था, जेठानी की कार हादसे में मौत हो चुकी थी, पहले मेरा रिश्ता उससे ही तय हो रहा था लेकिन मैंने शादीशुदा से शादी करने से मना कर दिया था, जिसकी वजह से मेरा रिश्ता गुरनाम से हो गया, वो मुझे काफी दमदार मर्द दिखा था, वो ही शायद मेरी जवानी संभाल पायेगा क्योंकि जितने आग मेरे अंदर है, आम मर्द की बस की बात नहीं थी।

शादी हुई, उसकी दुल्हन बन कर उसके गाँव चली गई मैं !

लड़की के साथ उसका भाई जाता है, पहली रात हमारे यहाँ पति-पत्नी एक साथ नहीं सोते। दो दिन बाद मुकलावे की रस्म के बाद मिलन की रात आती है। अगले ही दिन मुझे फेरे के लिए मायके जाना था।

वहाँ गई तो किसी काम से मुझे छत पर जाना पड़ा, माँ ने मुझे ऊपर स्टोर से प्याज लाने को कहा था, वहाँ काला सिंह, मेरा नौकर और आशिक पिछले रास्ते आ धमका। उसने मुझे बाँहों में लेकर चूमना शुरु किया- कैसी रही सुहागरात पम्मी ?

मैं बोली- कहाँ हुई है अभी ? आज मिलन की रात है ! उसको उस कमरे, मुझे दूसरे में सुलाया कमीनों ने !

आय हाय ! तेरा तो बुरा हाल होगा जानेमन !

काला, तुम ज़ख्मों पर नमक मत डालो ! और जाओ कोई आ गया तो बवाल मच जाएगा !

पहले वादा करो कि रात को छत पर मिलेगी !

आज नहीं !

उसने मुझे वहीं स्टोर में धर-दबोच लिया, मेरे लहंगे में हाथ डाल कर मेरी चूत मसलने लगा।

हाय काले ! छोड़ ! मैं बहक रही हूँ ! नीचे सभी हैं ! वादा रहा आऊंगी !

दो मिनट सहला दे मेरा पकड़ कर !

नहीं ! रात को !

मुझे पता था कि मैं आज नहीं रुकने वाली, मुझे वापस ससुराल जाना था, मैं नये माल का स्वाद लेना चाहती थी, काला सिंह अब बासा था, पुराना !

वो चला गया, शाम हुई, सभी मुझे विदा करवाने लगे !

रात हुई मुझे छत पर एक कमरे में बिठा दिया गया। मैं गुरनाम का इंतज़ार करने लगी। करीब एक घंटे बाद वो आया मेरे पास, मैं खड़ी हो गई, उसने दारु पी रखी थी, तीखी गन्ध आ रही थी लेकिन काला अक्सर मुझे पी कर ही चोदता था इसलिए मुझे कुछ अलग नहीं लगा।

वाह मेरे चाँद के टुकड़े ! ज़रा घूंघट उठा ! देखूं तो मेरा चाँद कैसा है ?

खुद उठा लो !

उसने मेरा घूंघट उठाया- वाह क्या बात है !

दरवाज़ा खुला है, मैंने कहा, क्योंकि उसने हाथ मेरे लहंगे की डोरी पर डाला था सीधे ही। डोरी खिंचते ही मैं नंगी हो जाती।

हाय ! अभी लो !

लगा कि गुरनाम बहुत रंगीन मर्द है ! लगता है आज गृह-प्रवेश के बाद वो मेरे ग्रह को शांत भी कर देगा।तभी उसको बाहर से किसी ने आवाज़ दी, वो बोला- मैं अभी आया !

उसने जाते-जाते बत्ती बुझा दी। कुछ देर में लौटा, लगता था कि एक और मोटा पेग खींच कर आया था।

उसने अपनी शर्ट उतारी, फिर अपनी पैंट, सिर्फ अंडरवीयर और बनियान में था। उसकी बॉडी ठीक-ठाक थी।

आकर उसने मेरी चोली खोली, लहंगे की डोर खींची। मैं बेड पर खड़ी थी, लहंगा नीचे गिर गया। मेरी जांघें देख उसका दिल डोलने लगा, दूध से गोरी थी, चिकनी पंजाबन के मखमली पट्ट थे- वाह क्या रन्न(औरत) है !

वो मेरी जांघें चूमने लगा। उसका हाथ मेरे फड़फड़ाते कबूतरों पर जा टिका। मैंने अपने आप ही हुक़ खोल दिए, मेरे स्तन आज़ाद होकर और फड़फड़ाने लगे।

क्या माल है साली तेरा !

उसने जैसे मेरा चुचूक पीना शुरु किया, मैं आपा खो बैठी, मैं उसके अंडरवीयर को खींच कर उसके लौड़े पर टूट पड़ी। खूब सहलाया, इतना बड़ा नहीं था, लेकिन मोटा था !

बोला- खेल लो इसके साथ !

मैंने चूमा, फिर धीरे से मुँह में लेकर दो तीन चुप्पे लगा दिए। उसने मेरी टाँगें खोलीं और बीच में आकर आसन लगा लिया और अन्दर डालने के लिए झटका दिया। मैंने सांस अंदर खींच ली ताकि उसको लगे कि इसकी बहुत टाईट है।

दो झटकों में आधा घुस गया, तीसरे में पूरा मैंने नाटक करते हुए चीख लगा दी।

क्या हुआ ?

बहुत तीखा दर्द है !

अभी मस्ती आएगी ! एक बार सेट होने दे !

लेकिन मेरी चूत की गर्मी से वो पिघल गया और जल्दी मुझे पर ढेरी हो गया। मेरी उमंग-कामनाएँ वहीं ख़त्म हो गई। मैंने काफी प्रयास किये लेकिन बोबारा दम नहीं पकड़ा उसने और वो सो गया।

मैं पूरी रात जलती रही अपनी कामाग्नि में !

फिर सोचा- पहली रात थी, मेरी जवानी है भी बहुत गर्म, हो गया होगा ! कल ठीक होकर करेगा तो मुझे ग्रह-शान्ति तक पहुंचा देगा।

लेकिन ऐसा वैसा कुछ नहीं हुआ, कभी बाद में उंगली से ठंडी करता, कभी जुबान से !

लेकिन मैं बहुत खफा थी उससे !

दस दिन बाद मुझे माँ लेने आई, उसके साथ मुझे तोर(भेज) दिया गया।

मैंने सोच लिया कि मैं माँ से सब बता दूँगी और वापस नहीं आउंगी।

अगले दिन माँ को बताने लगी थी कि मां बोली- शाम को बताना !

उसके जाते ही कुछ देर बाद काला और चंचल अंदर घुस आये। मैं काला से चिपक गई, सब कुछ बताया, वो बोला- यह तेरी सजा है ! मुझे जो धोखा दिया था !

कुछ ही पल में हम तीनों नंगे थे, एक मेरा दूध पीने लगा, दूसरा मेरी चूत चाटने लगा।

मैं खुलकर दोनों को शाबाशी देने लगी- वाह मेरे आशिको ! तुम ही मर्द हो !

पहले काले ने चोदा, फिर चंचल ने जी भर कर नज़ारे लिए। वो एक बार झड़े, मैं चार बार !

रोज़ दोनों से चुदवाती। छत पर बुलाती कभी एक को कभी दूसरे को !

एक रात चंचल ने मेरे साथ बिना निरोध कर दिया।

जब गुरनाम मुझे लेने आया तो मैंने माँ से कह दिया- मुझे वहाँ नहीं बसना !

लाख समझाने पर भी मैं नहीं मानी। गुरनाम को वापस भेज दिया, यहाँ मुझे चुदाई का हर सुख मिल रहा था। गुरनाम के घर वाले उससे वजह पूछते तो क्या कहता वो !

उधर काला को चोट लग गई, उसकी टांग टूट गई, वो बिस्तर पर था, चंचल मुझे संतुष्ट करता था, मैं उसको प्यार करने लगी और उससे इज़हार भी कर दिया। लेकिन उसकी बीवी थी, एक बच्चा था, फिर भी वो मुझे लेकर उड़ने को तैयार हो गया।

ऐसे एक महीना बीत गया, मैं चंचल के साथ भाग गई एक दिन ! लेकिन मैं वापस आ गई उसी दिन ! मैं नहीं चाहती थी उसके बच्चे मेरे कारण प्रभावित हों।

उसके बाद जब मैं गुरनाम के साथ वापस नहीं जाती थी तो एक दिन मुझे लेने जेठ जी आये। उन्होनें मेरे साथ अकेले में बात करने को कहा। पहले मैं राज़ी नहीं हुई लेकिन फिर मैं मान गई। उनसे मेरी जो बातचीत हुई उसे मैं बाद में लिखूंगी।

आपकी पम्मी

parmjit_urf_pammi@yahoo.com

कुछ मनोरंजन हो जाये



प्रिय पाठको, मैं शिल्पी उम्र बीस साल लक्ष्मीनगर, दिल्ली में रहती हूँ। जब मैं छटी कक्षा में थी तो मेरी माँ ने मुझे शिमला पढ़ने भेज दिया। ग्यारहवीं तक तो मैंने वहीं पढाई की लेकिन जब मैं बारहवीं में पहुँची तो मेरे साथ एक अजीब घटना घट गई। आज मैं आप सबको वही घटना बताने वाली हूँ।

शिमला में हमारा अपना एक छोटा सा घर था। मम्मी-पापा दिल्ली में रहते थे तो शिमला का घर खाली पड़ा था। ग्यारहवीं तक मैं हॉस्टल में थी लेकिन बारहवीं में जाने के बाद मैं अपने घर में रहने लगी। मैं खूबसूरत हूँ, कोई भी लड़का मुझे देख कर आह भरे बिना नहीं रह सकता, उस पर 32-25-32 की 18 साल की जवानी भी थी। मैं नए ज़माने की लड़की थी इसलिए कपड़े भी सेक्सी पहनती थी। मेरे घर के सामने एक और घर था उसमें चार लड़के रहते थे वो एक साथ बी.ए तृतीय में पढ़ते थे, उम्र में वो मुझसे लगभग चार साल बड़े थे।

जिस दिन से मैं अपने घर में रहने आई, उनकी नज़र मुझ पर रहती थी। मेरे घर के सामने एक बरामदा था जिसमें कुर्सी लगी थी। मैं अकसर शाम के समय वहाँ बैठ कर पढ़ती थी। घर में कोई और तो था नहीं, सिर्फ एक खाना बनाने वाली थी, समय से आती खाना बना कर और सफाई करके चली जाती।

एक दिन मैं स्कूल से घर आई तो देखा कि चार में से एक अपने घर के बाहर खड़ा होकर मेरे घर की तरफ देख रहा है। मैं उसका इरादा समझ गई। जवानी मेरी भी काबू में नहीं थी, घर में आकर मैं शीशे के सामने खड़ी हो गई और खुद को देखने लगी। मैंने जानबूझ कर दरवाजा खुला छोड़ दिया ताकि वो मुझे देख सके।

मैंने अलमारी से अपने लिए काले रंग की सिल्क की ब्रा और पैंटी निकली और फिर शीशे के सामने आ गई। वो अब भी लगातार मेरे कमरे में देख रहा था, शीशे में मुझे वो दिख रहा था।

मैंने अपने शर्ट के बटन खोल दिए और धीरे से उसे अपने शरीर से अलग किया। वो देख कर थोड़ा सजग हो गया, उसने अंदर से अपने तीनों दोस्तों को भी बुला लिया।

मैं स्कूल ड्रेस के नीचे ब्रा और पैँटी नहीं पहनती थी। मैंने पहले पैंटी पहनी और फिर स्कर्ट भी उतार दिया अब वो चारो मुझे पीछे से केवल पैंटी में देख रहे थे। फिर मैंने ब्रा पहनी और उसी तरह घूम कर शीशे की तरफ पीठ करके अपना हुक बंद किया। मेरी चूचियाँ और चिकनी नाभि देख कर वो चारों वासना के सागर में गोते लगाने लगे।

फिर मैंने अलमारी में से एक नीली स्कर्ट और गुलाबी टॉप निकाली और वापिस शीशे के सामने आ कर मैंने स्कर्ट पहना जो घुटने के कुछ ऊपर तक ही था। फिर टॉप जो चूचियों के कारण नाभि के ऊपर ही अटक जाता था। फिर मैं घूम के दरवाजे तक आई और ऐसा दिखाया कि मैंने उन्हें देखा ही नहीं।

थोड़ी देर बाद मैं किताब ले कर बाहर कुर्सी पर बैठ गई वो चारों अब भी वहीं थे, मेरी गोरी टांगें और चूचियाँ देख देख कर पागल हुए जा रहे थे।

तभी खाना बनाने वाली आ गई, लगभग डेढ़ घंटे तक वो घर में रही, खाना बनाया और फिर बाहर आकर बोली- मैंने खाना बना दिया है, खा लेना ! अब मैं जाऊँ?

मैंने कहा- ठीक है, जाओ !

अब मैं निश्चिंत थी। मेरे दिमाग में घूम रहा था कि मैं कैसे उनमें से किसी एक को कमरे में बुलाऊँ !

तो मैं थोड़ी देर बाद खुद ही उनके कमरे के तरफ चल पड़ी। वहाँ पहुँच कर मैंने उनमें से एक से कहा- सुनिए !

वो मेरी तरफ देखने लगा। उन्हें डर लगने लगा कि कहीं मैंने उन्हें देख तो नहीं लिया।

तभी मैंने कहा- जी मुझे एक सवाल नहीं आ रहा ! अगर आप में से कोई बता दे तो ?

मेरा इतना कहना था कि चारों एकदम खुश हो गए, लेकिन उनमें से एक राकेश मेरे साथ मेरे कमरे में आया। दरवाजे से अंदर आते ही उसने कहा- आप यहाँ अकेली रहती हैं क्या ?

मैंने कहा- हाँ ! क्यों ?

वो कहने लगा- नहीं, आप लड़की हैं और अकेली ?

मैंने दूरी कम करने के लिहाज से कहा- पहले तो आप मुझे आप नहीं कहेंगे क्योंकि मैं आप से छोटी हूँ ! और मैं छटी कक्षा से घर से बाहर रह रही हूँ इसलिए अब आदत हो गई है।

मैं उसे सीधे अपने सोने के कमरे की तरफ ले गई बिस्तर की तरफ इशारा किया और कहा- बैठिये !

और किताब ले आई। मैं उसके सामने पैर पर पैर चढ़ा कर बैठ गई। उसकी नजर मेरी गोरी टांगों पर थी। मैं समझ रही थी।

मैंने थोड़ा और नजदीक आकर पूछा- आप चारों एक साथ रहते हैं?

उसने कहा- हाँ !

उसकी नजर अब भी मेरी टांगों पर थी। फिर मैंने किताब का पन्ना पलट कर एक सवाल उसके सामने रख दिया। वो तेज था, उसने तुरंत सवाल हल कर दिया।

मैंने खुश होते हुए कहा- धन्यवाद, आपने मुझे कल टेस्ट में फ़ेल होने से बचा लिया ! अगर बुरा न माने तो क्या आप लोग आज रात का खाना मेरे साथ खाना पसंद करेंगे?

एक लड़की का सीधा आमंत्रण पा कर कोई जवान लड़का मना कैसे करता ! उसने कहा- लेकिन आपको तकलीफ होगी !

मैंने कहा- तकलीफ कैसी? नौकरानी खाना बना कर गई है। अपने मेरी इतनी मदद की है तो यह तो मेरा फ़र्ज़ है !

फिर उसने हाँ में सर हिला दिया। फिर वो बाहर की तरफ चल पड़ा। मैं उसे छोड़ने दरवाजे तक आई और जाते जाते उससे कहा- भूलिएगा मत ! ठीक नौ बजे !

उसने कहा- ठीक है !

मेरा मन जैसे झूम उठा, मेरी सहेलियाँ मुझे उनकी चुदाई की कहानियाँ बताती थी, मेरा भी मन करता था कि मेरे पास भी काश मुझे भी कोई चोदने वाला होता ! अब तक मैं बिलकुल कुँवारी थी, किसी ने हाथ भी नहीं लगाया था। लेकिन आज मेरी कुँवारी बुर हसीन सपने देख रही थी।

मैं बाथरूम गई और अपनी बुर को अच्छी तरह से साफ किया और उससे कहा- बस मेरी सहेली, आज तेरा इंतजार खत्म ! आज मैंने तेरे लिए चार-चार लौड़ों का इंतजाम किया है !

फिर मैं तैयार हो कर बाहर आकर कुर्सी पर बैठ गई और नौ बजने का इंतजार करने लगी। ठीक नौ बजे वो चारों घर से निकले, मैंने उन्हें घर से निकलते देख लिया था इसलिए मैं सोने का नाटक करने लगी।

वो चारों आये और मुझे सोता देख कर चुपचाप मेरे आसपास खड़े हो गए। नियत तो उनकी खराब थी लेकिन कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी।

तभी एक ने आवाज दी- सुनिए !

मैंने चौंक कर जागने का नाटक किया- ओह, आप लोग ! सॉरी, मेरी आँख लग गई ! आईये !

मैं उन चारों को लेकर अंदर आई, वो चारों मेरे पीछे पीछे मेरी मस्त चूतड़ देखते हुए चलने लगे।

फिर राकेश ने पूछा- आपका नाम क्या है?

मैंने कहा- शिल्पी ! और आपका ?

उन्होंने बारी-बारी अपना नाम बताया- राकेश, अमित, दिलीप और अजय !

मैंने कहा- खाना अभी खायेंगे या थोड़ा ?

उन्होंने पूछा- मतलब?

मैंने कहा- मतलब कुछ मनोरंजन हो जाये तो !

उन्होंने फिर पूछा- मतलब?

मैंने कहा- आप लोग पीने का शौक रखते हैं?

तो राकेश ने कहा- पीने का ? आप पीती हैं क्या ?

मैंने कहा- कभी कभी ! आप लोग ?

उन्होंने हाँ में सर हिला दिया।

मैंने उनको सोफे पर बैठने का इशारा किया और एक वोदका की बोतल और पांच गिलास ले आई। अमित एक तरफ, अजय एक तरफ और राकेश और दिलीप एक सोफे पर बैठे थे। मैं जब आई तो राकेश और अमित दोनों उठने लगे।

मैंने कहा- बैठे रहिये ! आप लोग मेरे मेहमान हैं !

और मैं राकेश और दिलीप के बीच में आकर बैठ गई।

इतनी खूबसूरत लड़की को अपने साथ बैठे देख कर चारो के लण्ड उछलने लगे होंगे। मैंने पेग बनाया और सबने लिया। दो पेग के बाद हल्का हल्का नशा चढ़ने लगा और बातें खुलने लगी।

दिलीप जो एकदम मुझसे चिपक कर बैठा था, मैंने उसकी जांघ पर अपना हाथ रखते हुए कहा- और बताईये क्या खातिर की जाये आपकी?

दिलीप हल्का सा आगे सरकता हुआ बोला- अजी कुछ नहीं !

उन्हें लगने लगा था कि मुझे नशा हो रहा है और उन्होंने सोचा कि इसका फायदा उठाया जाये।

तभी राकेश ने पूछा- अच्छा शिल्पी, एक बात पूछूँ ? बुरा तो नहीं मानोगी ?

मैंने थोड़ा सा झूमते हुए कहा- नहीं ! पूछो ना !

उसने पूछा- डू यू हैव ए बॉयफ़्रेंड ?

मैंने कहा- था ! पर अब नहीं ! हम दोनों ने झगड़ा कर लिया।

इससे उनकी हिम्मत बढ़ी, अजय बोला- अच्छा तो केवल फ्रेंडशिप थी या ?

मैंने बात काटते हुए कहा- नहीं, हम रिलेशनशिप में भी थे !

राकेश बोला- तो सेक्स ?

मैंने कहा- हाँ !

अब तक मैं दिलीप की पैंट पर लगातार अपना हाथ बार बार हिला रही थी और दिलीप का लण्ड एकदम खड़ा हो गया था।

वो मेरी तरफ झुकते हुए बोला- तो अब ?

ऐसा करने से उसका पैर मेरे पैर से छूने लगा था और मेरा हाथ अपने आप हिल के और उपर आ गया।

मैंने कहा- अब कहाँ ? अब तो किसी का इंतजार है !

उसने तुरंत कहा- हमारे बारे में क्या ख्याल है ?

मैं उसकी तरफ झुकते हुए बोली- उम्मं ! ख्याल बुरा नहीं है !

मेरा इतना कहना था कि उसका हाथ बढ़ा और मेरे कन्धों पर आ गया। उसने मुझे गर्दन से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठों से अपने होंठ सटा दिए। मेरा हाथ बरबस ही उसके लंड की तरफ बढ़ गया। जैसे मेरी मुराद पूरी हो गई। उसी हालत में चूमते-चूमते राकेश ने मेरी कमर पर हाथ रखा। दिलीप अपने दाहिने हाथों से मेरी चूचियाँ दबा रहा था। थोड़ी देर बाद उसने मुझे छोड़ा और अपनी पैंट की जिप खोलने लगा। मेरा हाथ अब भी वहीं था।

वो चारों अब तक समझ चुके थे कि मैं क्या चाहती हूँ !

फिर दिलीप अपने पैंट की ज़िप खोलने लगा मेरा हाथ अब भी वहीं था, मैं यह सब पहली बार कर जरूर रही थी लेकिन मुझे अच्छी तरह पता था कि दाल में तड़का कब और कैसे मारना है।

मैंने इंटरनेट पर और सीडी पर भी कई ब्लू फिल्में देखी हैं। राकेश पीछे से मेरी दोनों चूचियाँ पकड़ कर रगड़ने लगा। दिलीप का लंड अब मेरे हाथ में था और मैं धीरे धीरे उसकी मुठ मारने लगी। उसका लंड लगभग 6 इंच लंबा था।

मैंने मुस्कुरा कर अजय की तरफ देखा, वो उठ कर मेरी तरफ आया और वो उठ कर मेरे पैरों के पास मेरे दोनों घुटनों को पकड़ कर अपने घुटनों के बल बैठ गया। मेरी सिल्की ब्लू स्कर्ट मेरी दूधिया टांगों पर घुटनों के ऊपर तक थी।

फिर मैंने दिलीप की ओर देखते हुए उसके लंड अपनी जीभ से एक बार चाटा और उसे ऊपर के हिस्से को दोनों होंटों के बीच में दांतों के पहले दबा कर चूसने लगी। दिलीप की सिसकारी छुट गई, राकेश ने मेरी टॉप ऊपर कर दी और मेरी ब्रा के हुक खोल दिए।

अजय ने मुझे कूल्हों से पकड़ कर आगे की तरफ खींचा और मेरी बुर की तरफ झुक गया। फिर उसने मेरी पैंटी खींच कर निकाल दी।

मैं दिलीप का लण्ड मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी। हालांकि उस समय मुझे उसका स्वाद कुछ अजीब लगा लेकिन जैसे जैसे मेरे जीभ का रस उस पर गिरता गया, फिर वही मुझे अच्छा लगने लगा।

अजय अब मेरी बुर को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसने खींच कर मेरी स्कर्ट भी उतार दी और जीभ से कुत्तों की तरह कुरेद-कुरेद कर चाटने लगा जैसे मेरे तन की सारी आग मेरी बुर में जा समाई हो !

इसी आनंद में मैं दिलीप का लण्ड जोर-जोर से चूसने लगी। उसकी सिसकारियाँ बढ़ने लगी थी। मुझे आभास हुआ कि वो झड़ने वाला है। वो मेरा सर दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे मुँह में जोर-जोर से चोदने लगा। तभी अचानक जब वो एकदम झड़ने वाला था वो मेरा मुँह हटाने लगा। मैंने उसे हटाने नहीं दिया और उसका लंड पागलों की तरह चूसती रही।

अजय मेरी बुर को रगड़-रगड़ कर बेहाल किये हुए था लेकिन मुझे मजा आ रहा था, मुझे नशा चढ गया था और मुझे यह नहीं पता था कि मैं क्या कर रही हूँ।

इधर दिलीप जोर जोर से सिसकारियाँ भरता हुआ मेरे मुँह में ही झर गया और इसी आवेश में मैं भी झर गई। मैंने सारा रस अपने मुँह में ले लिया और पी गई और उसका लंड चाट कर साफ कर दिया। उधर अजय मेरी बुर को अभी भी चाटे जा रहा था। दिलीप ने मुझे चूते हुए कहा- कहीं और चलें?

मैंने कहा- कहाँ चलेंगे? बेडरूम में चलें?

उसने कहा- यह ठीक रहेगा !

फिर हम सब बेडरूम की तरफ चल दिए। मैं आगे आगे चल रही थी मेरा टॉप और ब्रा अब भी मेरे कन्धों में फंसा हुआ था। मैंने चलते में ही उन्हें उतार कर जमीन पर गिरा दिया। बेडरूम में आकर मैं बिस्तर पर बैठ गई।

राकेश ने अपनी पैंट खोल दी और मेरी तरफ आया। मैं पीछे सरकते हुए बिस्तर के दूसरे कोने पर पहुँच गई। राकेश मेरे पीछे-पीछे ठीक मेरे ऊपर से होता हुआ मेरे चेहरे तक आया और मुझे चूम कर कहने लगा- हाय मेरी जान ! आज तो तूने रात बना दी !

और धीरे धीरे नीचे सरकने लगा और मेरी चूचियाँ चूसने लगा। बाकी भी अब तक अपने कपड़े उतार कर मेरे अगल-बगल आकर खड़े हो गए।

अब मुझे चार-चार लण्ड एक साथ देख कर भय हुआ कि अब मेरी कुँवारी बुर का क्या होगा !

दिलीप अब मेरी बुर को जोर जोर से उँगलियों से छेड़ने लगा, राकेश मेरी चूचियाँ चूस रहा था और अमित जो अब तक कुछ नहीं कर रहा था, वो अपना लण्ड लेकर मेरे मुँह के सामने खड़ा था।

मेरे दाहिने हाथ में अजय का लंड था।

और सबकी तो कोई बात नहीं लेकिन अमित का लण्ड देख कर मुझे डर लगने लगा। उसका लंड लगभग 8 इंच लंबा था !

खैर जैसे तैसे मैं उसके लंड को चूसने लगी और अजय के लंड की जोर-जोर से मुठ मारने लगी। पूरा कमरा सिसकारियों से गूंज रहा था।

राकेश लगातार कभी चूचियाँ तो कभी नाभि चूस रहा था। लेकिन अमित का लण्ड मेरे मुँह में ठीक से जा नहीं रहा था, उसके बार-बार आने जाने से मेरे मुँह के किनारे फट गए थे।

अब राकेश ने मुझे चोदने के लिए अपना लण्ड ले जा कर मेरी कुँवारी बुर पर लगा दिया। पहली बार बुर पर लण्ड लगते ही ऐसा लगा मानो अब बस स्वर्ग मिलने वाला है।

मैंने अपनी दोनों टांगे फैला दी और उसने लण्ड का दबाव देना शुरू कर दिया।

मुझे दर्द महसूस होने लगा, मैं भीतर से एकदम सिहर गई और उसका लंड फिसल गया।

मैंने अमित का लण्ड मुँह से निकालते हुए कहा- बहुत दर्द हो रहा है !

दिलीप तुरंत ड्रेसिंग टेबल से हैण्ड-लोशन ले आया। अमित ने दोबारा अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। दिलीप ने अपने हाथों से लोशन निकाल कर मेरी बुर में अंदर तक लगाया और राकेश ने अपने लण्ड पर ! फिर राकेश मेरी बुर से अपना लंड लगा कर दबाव देने लगा। दर्द अब भी हो रहा था लेकिन लोशन की वजह से उसका लंड अचानक फिसल कर मेरी बुर को चीरता हुआ अंदर आधा घुस गया।

मेरी चीख निकल गई होती अगर अमित का लण्ड मेरे मुँह में नहीं होता तो !

मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा था, ब्लीडिंग हो रही थी।

यह देख कर राकेश ने कहा- यह देख यार ! यह तो कोरी है !

दिलीप ने कहा- सच? उसने कहा- हाँ ! देख खून बह रहा है !

यह सुन कर मुझे लगा कि पता नहीं क्या हो गया, मुझे दर्द का एहसास और तेज होने लगा, मैं छटपटाने लगी।

लेकिन राकेश ने मुझे कमर से पकड़ कर धक्के मारना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद ही मेरा दर्द कम हो गया और मुझे मजा आने लगा। उसके धक्के अब तेज हो गए थे। अजय का लण्ड मेरे मुँह में था और दिलीप मेरी गांड में लोशन लगा कर एक ऊँगली डाल कर अंदर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद राकेश अपना लण्ड निकाल कर मेरे मुँह की तरफ आ गया और मैं उसका लण्ड चूसने लगी।

और अजय अपना लण्ड मेरी बुर में डालने की कोशिश करने लगा लेकिन मेरा डर अभी बाकी ही था। फिर दिलीप ने अजय के कान में कुछ कहा और वो हट गया।

दिलीप ने मुझे उठने का इशारा किया और मैं उठ गई। वो मेरी जगह जा कर लेट गया और मुझसे अपने ऊपर आने के लिए कहा।

मैं समझ गई कि वो मेरी गांड मारने के लिए कह रहा है लेकिन मैं फिर भी उसकी तरफ बढ़ गई और अपनी गांड उसकी तरफ करके कुतिया बन गई। वो मेरी गांड से अपना लंड सटा के जोर लगाने लगा। अचानक उसका लंड मेरी गांड में घुस गया। अब मैं दर्द से चीख पड़ी और आगे की तरफ बढ़ गई। दिलीप ने मेरी कमर पकड़ कर मुझे रोक लिया और धक्के देने लगा। कुछ देर उसी तरह धक्के लगाने के बाद मेरा दर्द जब कुछ कम हुआ तो मुझे उसी तरह उठाया कर पीछे की तरफ लेट गया।

अब मैं उपर थी और मेरी बुर के ठीक अमित अपना लंबा लंड लिए खड़ा था। उसने झुक कर अपना लण्ड मेरी बुर पर लगा लिया और अजय का लंड मेरे हाथों में था, मैं उसे चूस रही थी।

लेकिन तभी अमित ने एक जोर का झटका मारा, जुल्मी ने पूरा लण्ड एक बार में अंदर डाल दिया। मैंने अजय के लंड को काट ही लिया था। वो जोर जोर से धक्के देने लगा। मुझे दर्द तो बहुत हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।

दिलीप नीचे से मेरी गांड में और अमित ऊपर से मेरी बुर में जोर जोर से धक्के मार रहे थे। अचानक धक्के मारते-मारते दिलीप मेरी गांड में ही झर गया और अपना सारा रस मेंरी गाण्ड में डाल दिया। उसके रस मेरी गांड गीली हो गई थी।

वो हटा और तुरंत राकेश जाकर वहाँ मेरी गांड के नीचे अपना लंड लगा कर लेट गया। मैं जैसे ही उस पर बैठी, वो अंदर घुस गया। अब जब राकेश और अमित मुझे धक्के लगा रहे थे तो मुझे बहुत मजा आ रहा था।

लगभग 10 मिनट के बाद अमित मेरी बुर में और अजय मेरे मुँह में झर गया। मैंने अजय का सारा रस पी लिया और दिलीप भी अपना लंड लेकर मेरे मुँह की तरफ आ गया। मैं उसका लण्ड लेकर चूसने लगी। जल्दी ही वो भी मेरे मुँह में झर गया। इस बीच मैं लगभग तीन बार झर चुकी थी।

फिर मैं जाकर वोदका और गिलास ले आई। पेग बनाते हुए मैंने उनसे पूछा- मजा आया ?

उन सबने खुश होते हुए कहा- बहुत मजा आया !

मैंने कहा- अब खाना खा लें?

उन्होंने कहा- हाँ !

मैं कुछ खाने का सामान बाज़ार से खरीद कर लाई थी और कुछ मेरी नौकरानी बना गई थी। मैं वैसे ही नंगी रसोई में चली गई और खाना लेकर वापस आई।

हमने वैसे ही नंगे खाना खाया। खाने के बाद वो सब अपने अपने कपड़े पहनते हुए मुझ से अलविदा लेने लगे और अपने घर चले गए।

वो तो चले गए लेकिन मुझे रात भर नींद नहीं आई।

मेरे दोस्तो, जब मैंने यह सब किया तो मैं सिर्फ 18 साल की थी और आज बीस साल की ! लेकिन इन दो सालों में मैं आज जिंदगी के ऐसे मोड़ पर हूँ जहाँ से अब मैं वापस नहीं जा सकती। इन दो सालों में मेरे साथ क्या क्या हुआ, यह मैं आप सबको जरूर बताउंगी ................

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बड़े घर की लड़की की बड़ी प्यास



मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 24 साल है। मैं बचपन से ही गर्म किस्म का इंसान हूँ, हसीन लड़की या औरत मेरी कमजोरी है ! मेरा लंड 9 इंच बड़ा है, जिसकी प्यास बुझाना सबके बस की बात नहीं !

मैं अपनी पहली कहानी लेकर आपके सामने आ रहा हूँ, क्योंकि मैं चाहता हूँ कि आप मुझे मेरे लंड की प्यास बुझाने का कोई उपाय बताएँ ! मेरा पहला सेक्स आपके सामने हाज़िर है !

मैं गुडगाँव से अपने कमरे पर जा रहा था जहाँ मैं अकेला रहता हूँ। मैंने कभी कोई साथी कमरे में नहीं रखा क्योंकि रात में मेरे सेक्स की आग जाग जाती है और मैं आग में जलने लगता हूँ और आप सोच ही सकते हैं कि मेरे साथ में रहने वालों का क्या हाल होगा ?

मेरे कई दोस्त मेरे लंड का स्वाद ले चुके हैं ! ये तो मेरी यौनेच्छा की बात है। मुझे कमरे तक पहुँचने के लिए बस या काल सेंटर की गाड़ी पकड़नी पड़ती है। मैं सड़क पर खड़े होकर गाड़ियों को हाथ दे रहा था कि तभी एक लम्बी कार मेरे सामने आकर रुकी, शीशा खुला, मैं देखते ही मानो होश खो बैठा ! ऐसा फिगर मैंने आज तक नहीं देखा- 36-24-32, क्या चूचियाँ थी ! गोरे गाल बिल्कुल दूध की तरह, गुलाबी होंठ जैसे बुला रहे हों कि आओ हमें चूस लो ! काले और लम्बे बाल, जो खुले हुए थे, उसकी उम्र लगभग 25 साल होगी, वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मुझे लगा कि मैं खड़े-खड़े झड़ जाऊँगा।

उसने पूछा- कहाँ जाना है आपको?

.........नेहरू प्लेस !

उसने अंदर आने का इशारा किया और मैं चुम्बक की तरह आगे वाली सीट पर बैठ गया। मेरी नज़र उसकी चूचियों से हट ही नहीं रही थी, उसके गोरे गालो को चूमने का मन कर रहा था। उसने लाल रंग का शॉर्ट टॉप और काले रंग की जींस पहन रखी थी।

........क्या देख रहे हो? उसने कहा।

तो मैं झिझक गया ....नहीं कुछ तो नहीं ! आप इतनी सुन्दर हैं कि कोई भी आपको देखता ही रह जाएगा !

उसने अपना हाथ गेयर की तरफ बढ़ाया और मेरी घुटने पर रख दिया। तभी मेरा लौड़ा और तन गया ! मैंने अपने लंड को दोनों हाथों से छिपा रखा था ताकि वो देख ना ले !

उतारते समय उसने अपना विज़िटिंग कार्ड देकर अगले दिन आने को कहा।

सॉरी, मैं उसका नाम बताना भूल गया- उसका नाम कोमल था,

अगले दिन मैं दिए पते पर पहुँच गया !

दरवाजा खुला, आज कोमल कल से ज्यादा स्मार्ट लग रही थी !

उसने मुझे चाय के लिए पूछा, मैंने मना कर दिया।

कोमल उंगली का इशारा करके अपने बेडरूम में चली गई। पीछे पीछे मैं भी चला गया। वो अपने कपड़े उतारने लगी !

........तुम कल क्या देख रहे थे ?

मैंने सोचा कि तुम्हें आज सब कुछ दिखा देती हूँ.....

इतना सुनते ही मैंने उसके होंठ चूस लिए, वो तड़प उठी जैसे बिन पानी मछली !

कोमल ने आज काले रंग की ब्रा और काले रंग की ही पैंटी पहन रखी थी। उसका जिस्म फूलों की तरह महक रहा था !

उसने अपने काले और लम्बे बाल खोल कर कहा- देख लो, जो देखना चाहते हो ! जितना करीब से चाहो !

मैं भूखे शेर की तरह टूट पडा !

मैं उसकी गोल-मटोल चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। वो मुझसे लिपट गई।

मुझे लगा कि मुझसे भी ज्यादा लोग गर्म हैं इस दुनिया में, जो जिस्म की आग में तप रहे हैं !

मैंने कोमल के जिस्म से आखिरी कपड़े भी अलग कर दिए !

अब वो मेरे कपड़े उतारने लगी तो मैं उसकी पीठ सहलाने लगा।

मैंने धीरे से उसके कान को काट लिया, उसके मुँह से उफ्फ्फ्फफ्फ़ की आवाज़ आई। वो मुझसे सांप की भांति लिपट गई।

मैंने उसे उठा कर उसकी चूचियों को मुँह में लेना चाहा तो उसने पहले चूत की तरफ इशारा किया।

मैं तभी चूत की तरफ मुड़ गया ! कोमल की चूत बिलकुल टमाटर की तरह लाल और अंगूर की तरह छोटी थी।

मैंने चूत को मुँह में ले लिया और जोर जोर से चाटने लगा ! उसके मुँह से आह आह आह आह आह आह आह आह की आवाज़ निकलने लगी।

उसने एक हाथ से मेरा लण्ड सहलाना शुरु कर दिया। उसका एक हाथ मेरे सर पर था, वो मुझे ऐसे दबा रही थी कि मानो कह रही हो- मेरी चूत में घुस जाओ !

इतनी कामुक औरत मैने अपनी जिंदगी में नहीं देखी !

मैं कोमल के ऊपर आ गया। अब मेरा लंड उसके मुँह में था और मैं उसकी चूत का स्वाद ले रहा था !

वो लंड को ऐसे चूस रही थी कि जैसे लग रहा था कि काट कर खा जाएगी !

मै उसे मना नहीं कर पाया, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था !

20-25 मिनट तक हम एक दूसरे को चाटते रहे ! इस बीच वो दो बार पानी छोड़ चुकी थी मगर मेरा निकल ही नहीं रहा था !

मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकालना चाहा तो जिद करने लगी- मुझे पानी पीना है !

मैंने समझाया- चूत में डालेंगे तो पी लेना !

वो मान गई !

मैंने उसके होंट चूसना शुरु कर दिए और एक हाथ से कोमल की चूची मसलने लगा। वो मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी। उसका हाथ मेरी पीठ को सहला रहा था। वो जिस्म की आग से तप रही थी। उसने मुझे अपनी ओर खींचा जैसे कह रही हो- मेरे जिस्म मे समा जाओ !

मैंने उसके जिस्म को ऐसे चाटना शुरु किया जैसे वो कोई लॉलीपॉप हो !

वो उफ़ उफ़ उफ़ किये जा रही थी और कह रही थी- फाड़ दो ! मेरी चूत फाड़ दो ! मेरी प्यास बुझा दो ! जानू मेरी चूत को चोद कर भोसड़ी बना दो ! मेरी प्यास बुझा दो ! मेरे जिस्म को ठंडा कर दो ! मेरी आग बुझा दो !

करीब 30 मिनट तक मैं उसे चाटता रहा ! उसने मुझे ऊपर खींच लिया- डाल दो, डालो न ! क्यों तड़पा रहे हो ? प्लीज डाल दो जानू ! मेरी जान, मेरी चूत में घुस जाओ !

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा ही था कि वो दर्द के मारे रो उठी, मैं समझ गया कि वो कुंवारी बुर थी !

बिस्तर पर खून ही खून !

वो डर गई !

मैंने उसे समझाया कि ऐसा पहली बार में होता है, बस थोड़ी देर में सब ठीक हो जायेगा।

मैं जोर जोर से झटके मार रहा था और कोमल भी मेरा साथ दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे दर्द हो ही न रहा हो !

मैंने पूछा तो बोली- दर्द से बड़ी प्यास है ! पहले मेरी प्यास बुझ जाये ! प्लीज फाड़ डालो ! होने दो दर्द ! फट जाने दो मेरी चूत को !

मेरा 9 इंच का लंड उसकी योनि के अंदर ऐसे जा रहा था जैसे कोई गर्म छड़ हो ! और वो बार बार कह रही थी- साली को फाड़ दो ! मेरी चूत को फाड़ दो ! मेरी जान, मेरे प्यारे राजा !

मैं उसकी चूत चोद ही रहा था कि अचानक दरवाज़ा खुला !

अब मेरे पैरों तले जमीन नहीं रही !

आगे की कहानी आपके मेल मिलने बाद ! कि मेरा क्या हुआ ? दरवाज़े के पीछे कौन था जानने के लिए मुझे मेल करें !

aditya15286@gmail.com

गर्लफ्रेंड की चचेरी बहन और उसकी सहेली



यह मेरी सच्ची कहानी है। मेरी एक गर्लफ्रेंड हुआ करती थी पायल ! करीब छः साल पहले हम दोनों एक दूसरे के बहुत के करीब थे और शादी करना चाहते थे। हम रोज़ मिलने की कोशिश करते थे और सेक्स भी करीब रोज़ ही करते थे। हमने घर, गाड़ी, शॉपिंग-सेंटर, जंगल जैसी जगहों पर बहुत बार सेक्स किया हुआ है।

यह उस दिन की बात है जब पायल की एक चचेरी बहन और उसकी सहेली उसके घर रहने आई हुई थी। तीनों एक से एक सुन्दर थी।

पायल ने मुझे रात को करीब डेढ़ बजे फ़ोन किया, बोली- मिलने का मन कर रहा है !

मैंने फटाफट अपनी गाड़ी निकली और उससे मिलने पहुँच गया। किसी तरह मैं उनके मोहल्ले वालों की नजरों से बच कर उसके घर पहुँचा। वहाँ मैं उसकी चचेरी बहन मोनिका से मिला जो मेरी काफी अच्छी दोस्त बन चुकी थी लेकिन उसकी सहेली गीता से पहली बार मिला। हमने फ़ोन पर तो कई बार बात की थी पर मिले हम पहली बार थे। उसके मोम्मे उम्र के हिसाब से बहुत बड़े थे।

तीनों ने निक्कर और टी-शर्ट पहनी थी और उन्हें देखते ही मुझे ठरक चढ़ गई। पर मैंने सोचा कि मैं तो पायल के साथ गम्भीर हूँ, अगर हमारे सम्बन्ध गम्भीर ना होते तो मैं आज इन तीनों को चोद देता।

हम लोगों ने थोड़ी देर बातें की और फिर मोनिका और गीता के बॉयफ़्रेन्ड का फ़ोन आ गया। क्योंकि हमारे पास एक ही कमरा था तो हम सब बिस्तर पर बैठे हुए थे। हमने लाइट बंद की और मैं और पायल लेट कर बातें करने लगे।

थोड़ी देर में हमारी एक तरफ मोनिका और दूसरी तरफ गीता आकर लेट गई। अभी भी दोनों फ़ोन पर ही थी।

मैं और पायल काफ़ी पास लेटे हुए धीरे-2 बातें कर रहे थे।

करीब तीन बजे मुझे लगा कि गीता और मोनिका सो गई हैं तो मैंने मन में सोचा कि थोड़े मजे लिए जाये और लेटे-लेटे बिना पायल को पता लगते हुए मैंने गीता की गाण्ड पर हाथ रख दिया। 5-10 सेकंड निकल गए और गीता हिली तक नहीं। मैं इसे इशारा समझ कर उसकी निक्कर के ऊपर से हाथ फेरने लगा और उसकी चिकनी टांगों तक चला गया। तब भी गीता कुछ नहीं बोली।

फिर मैंने सोचा कि क्यों न अपनी असली साली मोनिका पर भी हाथ फेरा जाये।

किसी तरह मैंने पायल से बचते बचाते हुए उसकी दूसरी तरफ आ गया और मोनिका की तरफ बिस्तर पर लेट गया। अँधेरे मैं कुछ दिख तो नहीं रहा था और मैंने धीरे-2 हाथ मोनिका की तरफ बढ़ाना शुरू किया और बिल्कुल पहले की तरह नींद की एक्टिंग करते हुए मैंने अपना हाथ मोनिका के मोम्मे से थोड़ा नीचे रख लिया। मेरा हाथ उसकी सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहा था। मैंने एक झटके में हाथ हटाने के चक्कर में उसके मोम्मे से टकराता हुआ हाथ वापिस अपने पास रख लिया।

उसने भी कोई हरकत नहीं की। मैं समझ गया कि या तो दोनों मजे देने के चक्कर में हैं या फिर दोनों गहरी नींद में सो चुकी है क्योंकि उन तीनों ने रात की पार्टी में थोड़ी व्हिस्की पी हुई थी। मैंने उस समय ठान लिया कि आज तो दोनों से पूरे मजे लेने है वरना यह मौका पता नहीं दोबारा मिले न मिले !

तो मैंने फिर अच्छी तरह कभी मोनिका तो कभी गीता पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। करीब दस मिनट के बाद गीता मेरी तरफ मुड़ी और मैं जैसे ही हाथ हटाने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी निक्कर के अन्दर अपनी कच्छी में डाल दिया। मैं पागल हो गया, मैंने पायल की तरफ देखा तो वो मुझे देख कर मुस्कुराई। वो थोड़ी सी नशे में थी।

मैंने सोचा कि अब होने दो जो होता है ! देख लेंगे !

मैं उठा और मैंने गीता और पायल को जोर से चूमना शुरू कर दिया। दोनों ही एकदम मस्त हो रही थी कि इतने में मेरे पीछे से मेरे ऊपर मोनिका आकर लेट गई और बोली- मेरे पास पहले क्यों नहीं आया तू सागर ?

उसका इतना ही बोलना था कि मैं पीछे की ओर पलटा और मैंने मोनिका के मम्मे दबाने शुरू कर दिए। उस दिन उन तीनो में से किसी ने ब्रा नहीं पहनी थी। मैं तीनों के मोम्मे दबाने और चूसने लगा और वो तीनो मुझे पूरे शरीर पर चूमने लगी। मेरा लण्ड जो बहुत देर से खड़ा था, गीता के हाथ में आ गया।

मैंने तीनों को बोला- अगर लण्ड देखना है तो तीनों अपने कपड़े उतारने दो मुझे !

तो वो तीनों मान गई।

मैंने एक-एक करके तीनों को चूमते-2 उनके कपड़े उतार दिए। अब तीनों मेरे सामने बिस्तर पर नंगी लेटी हुई थी। मैंने बारी बारी तीनों की योनि चाटी और उन तीनों के पूरे शरीर पर हाथ फेरा। अब तीनो बुरी तरह गरम हो चुकी थी।

मैंने उनसे पूछा- लण्ड देखना है?

तो तीनों उठ खड़ी हुई।

मैं बिस्तर पर बैठ गया और उनसे बोला- मेरी निक्कर को बिना हाथ लगाये उतारो और देख लो मेरा लण्ड !

तीनों तुरंत उठी और मेरी निक्कर अपने दांतों से खींचने लगी। मैं उन तीनों को देख कर और पागल हो रहा था, साथ ही तीनों कि मम्मे, चूत और गांड पर हाथ फेर रहा था। इतने में मेरी निक्कर नीचे खींच ली उन्होंने।

बस फिर क्या था- कोई लण्ड को चूम रही थी तो कोई मेरे अण्डकोषों से से खेल रही थी। तीनों ने मुझे बीच में लेटा कर खूब चूमा और फिर जब मुझे से रहा न गया तो मैं बोला- मैं झड़ने वाला हूँ, तो जिसने चूसना है वह अपने मुँह में ले ले !

मेरा इतना बोलना था कि तीनों मेरे लण्ड के लिए लड़ने लग पड़ी। वो समय मेरी जिन्दगी में आज तक का सबसे मज़ेदार समय था। मैं तो अपने आप को भगवान् मान रहा था।

फिर करीब पाँच मिनट के बाद मैं झड़ गया। तीनों के होठों पर मेरा वीर्य लगा था !

तब करीब पाँच बज रहे थे और हम थक चुके थे। हम चारों उठे, रोशनी होने से पहले में फटाफट घर भागना चाहता था पर बाहर देखा तो काफी लोग सुबह की सैर के लिए निकल चुके थे। पकड़े जाने के

डर से मैं अगला पूरा दिन उन तीनों के साथ उसी एक कमरे में रहा।

अगले दिन की कहानी सुनने के लिए थोड़ा सब्र करो !

अब हम चारों की अलग-2 शादी हो चुकी है पर मेरे पास अभी भी उनकी उस दिन की नंगी तस्वीरें हैं जो मैंने बहुत संभाल कर रखी हुई हैं।

आपको यह कहानी कैसी लगी? मुझे मेल करें !

8 Oct 2012

भाभी की मस्त बुर

मै उस समय 15 साल का था। मेरे लंड पर बाल उग आए थे। मै अक्सर रात को अपने बिस्तर पर नंगा लेट कर अपने लंड के बाल को सहलाया करता था। एवं अपने लंड को खड़ा कर उसे सहलाता रहता था। एक रात मै अपने लंड को सहला रहा था । उसमे मुझे बहूत आनंद आ रहा था। अचानक मै जोर जोर से अपने लंड को अपने हाथ से रगड़ना शुरू किया । मुझे ऐसा करना बहूत अच्छा लग रहा था। अचानक मेरे लंड से मेरा माल निकलने लगा । उत्तेजना से मेरी आँखे बंद हो गई। 5-6 मिनट तक मुझे होश ही नही रहा। ये मेरा पहला मुठ था। इसके पहले मुझे इसका कोई अनुभव नही था। मै बाथरूम में जा कर अपने लंड को धोया और बेड पे आया तो मुझे गहरी नींद आ गई।

अगली सुबह मै अपने रूम से बाहर निकला तो देखा की भइया अपने ऑफिस के लिए तैयार हो रहे हैं। उनकी शादी हुए 2 साल हो गए थे। भाभी मेरे साथ बहूत ही घुली मिली थी। मै अपनी हर प्रोब्लम उनको बताया करता था। मेरे माता-पिता भी हमारे साथ ही रहते थे। थोडी देर में भईया अपने ऑफिस चले गए। पिता जी को कचहरी में काम था इस लिए वो 10 बजे चले गए। मेरे पड़ोस में एक पूजा था सो माँ भी वहां चली गई। मैंने देखा की घर में मेरे और भाभी के अलावा कोई नही है। मै भाभी के रूम में गया। भाभी अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी। मै उनके बगल में जा कर लेट गया। मेरे लिए ये कोई नई बात नही थी। भाभी को इसमे कोई गुस्सा नही होता था। भाभी ने करवट बदल कर मेरे कमर के ऊपर अपना पैर रख कर अपना बदन का भार मुझे पे डाल दिया
और कहा- क्या बात है राजा जी ? आप कुछ परेशान लग रहें हैं।

भाभी अक्सर मेरे साथ ऐसा करती थी।

मैंने कहा- भाभी कल रात को कुछ गजब हो गया। आज तक मेरे साथ ऐसा नही हुआ था।

भाभी ने पुछा- क्या हुआ?

मैंने कहा - कल रात को मेरे लंड से कुछ सफ़ेद सफ़ेद निकल गया। मुझे लगता है कि मुझे डाक्टर के पास जाना होगा।

भाभी ने मुस्कुरा के पुछा- अपने आप निकल गया?

मैंने कहा - नही , मै अपने लंड को सहला रहा था तभी ऐसा हुआ।

भाभी ने कहा- राजा बाबू अब आप जवान हो गए हो। ये सब तो होगा ही।लगता है कि मुझे देखना होगा।

भाभी ने अपना हाथ मेरे लंड के ऊपर रख दिया। तथा धीरे धीरे इसे दबाने लगी। इस से मेरे लंड खड़ा होने लगा।

भाभी बोली- जरा दिखाइए तो सही ।

मै कुछ नही बोला। मैंने धीरे से अपने पेंट का बटन खोल दिया। भाभी ने मेरे पेंट को नीचे की ओर खींचा और उसे पूरी तरह खोल दिया। अब मै सिर्फ़ अंडरवियर में था। भाभी अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लंड को सहला रही थी।

बोली- क्या इसी से कल रात को सफ़ेद सफ़ेद निकला था?

मैंने कहा - हाँ।

भाभी ने कहा - अंडरवियर खोलिए।

मैंने कहा - क्या भाभी, आपके सामने मै अपना अंडरवियर कैसे खोल सकता हूँ?

भाभी बोली - अरे जब आप मेरे को अपना पूरा प्रोब्लम नही बतायेगे तो मै कैसी जानूंगी कि आपको क्या हुआ है? और मुझे क्या शर्माना? अपनों से कोई शर्माता है भला? जब आपके भइया को मेरे सामने अपने कपड़े खोलने में कोई शर्म नही है तो फिर आप क्यों शरमाते हैं?

मै इस से पहले की कुछ बोलता भाभी ने मेरा अंडरवियर पकड़ कर अचानक नीचे खींच लिया। मेरा लंड तन के खड़ा हो गया। भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया.
और कहा - अरे राजा बाबू आप तो बहूत जवान हो गए हैं।

भाभी मेरे लंड को पकड़ कर सहला रही थी। मेरे लंड से थोड़ा थोड़ा पानी निकलने लगा । अचानक भाभी मेरे को जकड कर नीचे की तरफ़ घूम गई। इस से मै भाभी के शरीर पर चढ़ गया। भाभी का शरीर बहूत ही मखमली था।

भाभी ने मुझसे कहा - मुझे चोदियेगा?

मै कहा - मै नही जानता।

भाभी ने मेरे शरीर को पकड़ लिया और कहा - मै सीखा देती हूँ। पहले मेरा ब्लाउज खोलिए।

मैंने भाभी का ब्लाउज खोल दिया । भाभी का चूची एकदम सफ़ेद सफ़ेद दिख रहा था। मैंने कभी सोचा भी नही था कि भाभी का चूची इतना सफ़ेद होगा। मै भाभी के चूची को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा।

भाभी ने कहा - ब्रा तो खोलिए तब ना मज़ा आएगा।

मैंने भाभी की ब्रा भी खोल दिया। अब भाभी का समूचा चूची मेरे सामने तना हुआ खड़ा था। मैंने दोनों हाथो से भाभी की चूची को पकड़ लिया और
कहा - क्या मस्त चुच्ची है आपकी भाभी?

मै भाभी के चुचियों को धीरे धीरे दबा रहा था ।

अचानक भाभी ने कहा - मेरी साड़ी खोलिए ना तब और भी मज़ा आएगा।

मैंने एक हाथ से भाभी की साड़ी खोल दिया। भाभी अब सिर्फ़ पेटीकोट में थी।

फ़िर मैंने भाभी को कहा - क्या पेटीकोट भी खोल दूँ?

भाभी बोली - हाँ।

मै बैठ कर भाभी का पेटीकोट का नाडा खोला और झट से उतर फेंका। अब मेरे सामने जो नजारा था मै उसकी कल्पना सपने में भी नही कर सकता था। भाभी का बुर एकदम सफ़ेद सा था। उसपर घने घने बाल भी थे। मै भाभी के बुर को देख रहा था। कितना बड़ा बुर था। बुर के अन्दर लाल लाल छेद दिख रहा था।

मैंने भाभी को कहा - आपको भी बाल होता है?

भाभी सिर्फ़ मुस्कुराई।

भाभी बोली - छु कर तो देखिये।

मै भाभी के बुर को धीरे धीरे छुने लगा। भाभी बुर का बाल मै एक तरफ़ कर के मै उसे फैला के देखने की कोशिश करने लगा कि ये कितना बड़ा है। मुझे उसके अन्दर छेद नजर आ रहा था।

भाभी से मैंने पुछा - भाभी , ये छेद कितना गहरा है?

भाभी ने कहा - ऊँगली डाल के देखिये न?

मै बुर में ऊँगली डाल दिया। मै अपनी ऊँगली को भाभी के बुर में चारों तरफ़ घुमाने लगा। बहूत बड़ा था भाभी का बूर। मै बूर से ऊँगली निकाल के भाभी के शरीर पे लेट गया। भाभी ने अपने दोनों पैर को ऊपर उठा के मेरे ऊपर से घूमा के मुझे लपेट लिया। मै भाभी के शरीर को जोर से पकड़ लिया। मेरी साँसे बहूत तेज़ हो गई थी। मेरा सारा छाती भाभी के चूची से रगड़ खा रहा था। भाभी ने मेरे सर को पकड़ के अपने तरफ़ खींचा और अपने होठ को मेरे होठ से लगा दिया। मै भी समझ गया कि मुझे क्या करना है? मै काफी देर तक भाभी के होठो को चूमता रहा। चुमते चुमते मेरे शरीर में उत्तेजना भरती गई। मै भाभी के होठ को छोड़ कर कुछ नीच आया और भाभी के चूची को मुह में ले कर काफ़ी देर तक चूसता रहा। भाभी सिर्फ़ गर्म साँसे फेंक रही थी। फिर भाभी अचानक बैठ गई और मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। मै लेट कर भाभी का तमाशा देख रहा था। भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू किया। वो मेरी लंड के सुपाडे को ऊपर नीचे कर रही थी। मै पागल हुआ जा रहा था। भाभी ने अचानक मेरे लंड को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। पूरे मुंह में मेरा लंड घुसा ली। मै एकदम से उत्तेजित हो गया।

मैंने भाभी को कहा- भाभी, प्लीज ऐसा मत कीजिये।

लेकिन भाभी नही मानी। वो मेरे लंड को अपने मुंह में पूरा घूसा ली। अचानक मेरे लंड से माल निकलने लग गया। मेरी आँखे बंद हो गई। मै छटपटा गया। सारा माल भाभी के मुंह में गिर रहा था लेकिन भाभी ने मेरे लंड को अपने मुंह से नही निकाला। और मेरा सारा माल भाभी पी गई। 2-3 मिनट के बाद मुझे होश आया। देखा भाभी मेरे शरीर पर लेटी हुआ है और मेरे होठों को चूम रही है।

भाभी बोली- ऐसा ही माल निकला था रात में?

मैंने कहा - हाँ भाभी.

भाभी ने कहा- ये तो जवानी की निशानी है मेरे देवर जी. अब आप जवान हो रहे हैं.

मैंने कहा- अब मै जाऊं भाभीजी ?

भाभी बोली - अरे वाह राजा जी अभी तो खेल बाकी है।अब जरा मुझे चोदिये तो सही।

मै बोला- क्या अभी भी कुछ बाकी है? लेकिन मै भी कुछ करना चाहता हूँ.

भाभी बोली - आप क्या करना चाहते हैं?

मै बोला - जिस तरह से आपने मेरे लंड को चूसा उसी तरह से मै भी आपके बूर को चूसना चाहता हूँ।

भाभी बिस्तर पे लेट कर अपनी दोनों पैर को अगल बगल फैला दिया। अब मुझे भाभी का बुर का एक एक चीज साफ़ साफ़ दिख रहा था। मै नीच झुक कर भाभी के बुर में अपना मुंह लगा दिया। पहले तो बूर के बाल को ही अपने मुंह से खींचता रहा। फ़िर एक बार बुर के छेद पर अपने होठ रख कर उसका स्वाद लिया। बड़ा ही मज़ा आया। मै और जोर से भाभी के बुर को चूसने लगा। चूसते चूसते अपनी जीभ को भाभी के बूर के छेद के अन्दर भी घुसा दिया। भाभी को देखा तो वो अपनी आँख बंद कर के यूँ कर रही थी जैसे कि कोई दर्द हो रहा है।तभी भाभी के बुर से हल्का हल्का पानी के तरह कुछ निकलने लगा। मैंने उसका स्वाद लिया तो मुझे कुछ नमकीन सा लगा. थोडी ही देर में मेरा लंड तन के खड़ा हो गया था। मै भाभी के होठ को चूमने के लिए जब उनके ऊपर चढा तो मेरा लंड उनके बुर से सट गया। भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया और
कहा - राजा जी अब मुझे चोदिये न ।

मैंने कहा - मगर कैसे भाभीजी? क्या और भी मज़ा हो सकता है?

भाभी धीमे से मुस्कुराई और कहा - अब तो असली मज़ा बांकी है।

मै कहा - क्या करुँ?

भाभी बोली - अपने लंड को मेरे बूर में डालिए।

मैंने कहा - इतना बड़ा लंड आपके बुर के इतने छोटे से छेद में कैसे घुसेगा?

भाभी बोली- आप डालिए तो सही।

भाभी ने अपने दोनों पैरों को और फैलाया। और मेरे लंड को पकड़ के अपने बूर के छेद के पास लेते आई।

बोली- घुसाइए.

मैंने संदेह्पुर्वक अपने लंड को उनके बूर के छेद में घुसना शुरू किया। ये क्या? मेरा सारा का सार लंड उनके बूर में घूस गया। मुझे बहूत ही मज़ा आया। भाभी को देखा तो उनके मुंह से सिसकारी निकल रहा था। मैंने डर के मारे झट से अपने लंड को उनके बूर से बाहर निकल लिया।

भाभी ने कहा - ये क्या किए?

मैंने कहा- आपको दर्द हो रहा था ना?

वो बोली- धत , आपके भइया तो रोज़ मुझे ऐसा करते हैं। इसमे दर्द थोड़े ही होता है। इसमे तो मज़ा आता है। चलिए डालिए फ़िर से अपन लंड मेरे बूर के छेद में।

मै इस बार अपने लंड को अपने से ही पकड़ कर भाभी के बूर के छेद के पास ले गया और पूरा पूरा लंड उनके बूर में घूसा दिया। भाभी के मुंह से एक बार फ़िर सिसकारी निकली। मै उनके बुर में अपना लंड डाले हुए 1 मिनट तक पड़ा रहा। मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था कि अब क्या करना है। मै अपने दोनों हाथो से भाभी के चुचियों से खेलने लगा।

भाभी बोली- खेल शुरू कीजिये ना।

मै बोला- अब क्या करना है?

भाभी बोली - चोदना शुरू कीजिये ना।

मै बोला- अभी भी कुछ बांकी है? अब क्या करुँ?

भाभी बोली - मेरे बुध्धू राजा बाबू ! अपने लंड को धीरे धीरे मेरे बूर में ही आगे पीछे कीजिये।

मै बोला - समझा नही।

भाभी बोली- अपने कमर को आगे पीछे कर के अपने लंड को मेरे बूर में आगे पीछे कीजिये।

मै ऐसा ही किया। अपने कमर को आगे पीछे कर के लंड को भाभी के बूर में अन्दर बाहर करने लगा। भाभी का शरीर एंठने लगा।

मै बोला कि - निकाल लूँ क्या?

भाभी बोली - नही। और जोर से चोदिये।

मै भाभी के कमर को अपने हाथ से पकड़ लिए और अपने लंड को उनके बूर में आगे पीछे करने लगा। मुझे अब इसमे काफ़ी मजा आ रहा था। मेरा लंड उनके बूर से रगडा रहा था। मै पागल सा होने लगा। 5 मिनट तक करने के बाद देखा कि भाभी के बुर से पानी निकल रहा था। भाभी अब निढाल सी हो रही थी। मै भाभी के शरीर पर लेट कर उनकी चोदाई जारी रखी।

भाभी बोली - जल्दी जल्दी कीजिये राजा जी ।

मै बोला - कितनी देर तक और करुँ?

वो बोली - मेरा तो माल निकल गया है। आपका माल जब तक नही निकलता तब तक करते रहिये।

मैंने और जोर जोर से उनको चोदना जारी कर दिया। उनका सारा शरीर मेरे चोदाई के हिसाब से आगे पीछे हो रहा था। उनकी चूचियां भी जोर जोर से हिल हिल कर ऊपर नीचे हो रही थी। मुझे ये सब देखने में बहूत मज़ा आ रहा था। मै सोच रहा था कि ये चोदाई का खेल कभी ख़तम ना हो। तभी मुझे लगा कि मेरे लंड से माल निकलने वाला है।

मै भाभी को बोला- भाभी मेरा लंड से माल निकलने वाला है।

भाभी बोली - लंड को बुर से बाहर मत निकालिएगा। सब माल बुर में ही गिरने दीजियेगा।

मैंने उनको चोदना जारी रखा। 15-20 धक्के के बाद मेरे लंड से माल निकलना शुरू हो गया। मेरी आँख जोरो से बंद हो गई। मैंने अपने लंड को पूरी ताकत के साथ भाभी के बूर में धकेलते हुए उनके शरीर को कस के पकड़ के उनको लिप्त कर उनके ही शरीर पर गिर गया।

बोला - भाभी , फ़िर माल निकल रहा है।

भाभी ने मुझे कस के पकड़ के मेरे कमर को पीछे से पकड़ कर अपने तरफ़ नीचे की ओर खींचने लगी। 2 मिनट तक मुझे कुछ होश नही रहा। आँख खुली तो देखा मै अभी भी भाभी के नंगे शरीर पे पड़ा हूँ। भाभी मेरे पीठ को सहला रही थी। मेरे लंड से सारा माल निकल के भाभी के बुर में समां चुका था। मेरा लंड अभी भी उनके बुर में ही था।

मै उनके चूची पर अपने सीने के दवाब को बढ़ते हुए कहा- क्या इसी को चुदाई कहते हैं?

भाभी बोली - हाँ, कैसा लगा?

मै कहा - बहूत मज़ा आता है । क्या भईया आपको ऐसे ही चोदते हैं?

वो बोली- हाँ,

मैंने पूछा- क्या भैया आपको हर रात को चोदते हैं?

भाभी बोली-हाँ, लगभग हर रात को ।

मै कहा - क्या अब मुझे आप चोदने नही दोगी?

वो बोली- क्यों नही? रात को भइया की पारी और दिन में तुम्हारी पारी।

मैंने कहा- ठीक है।

भाभी बोली - जब तुम्हे मुझे चोदने का मौका नही मिले अपने हाथ से ही लंड को सहला लेना और माल निकाल लेना।

मैंने कहा - ठीक है।

उसके बाद मैंने अपना लंड को उनके बुर से निकाला। भाभी ने उसे अपने हाथ में लिया
और कहा- रोज़ इसमे तेल लगाया कीजिये। इस से ये और भी बड़ा और मोटा होगा।

भाभी के बूर को मै फ़िर से सहलाते हुए पुछा - मुझे नही पता था कि इस के अन्दर इंतना बड़ा छेद होता है।

भाभी बोली - सुनिए, कल आप आने लंड के बाल को शेव कर लीजियेगा। मै भी आज रात को शेव कर लूंगी। तब कल फिर आपको चोदने के और भी तरीके बताऊँगी। हाँ ये बात किसी को बताइयेगा नही।

इसके बाद भाभी ने मुझसे और भी कई तरीके से अपनी चुदवाई करवाई । आज तक किसी को इस बात का नही चला। a

12 Aug 2012

मैंने अपनी बुआ की लड़की को चोदा

मेरा नाम अमित है, मैं दिल्ली(रोहिणी) का रहने वाला एक इंजीनीयर हूँ। मैं 23 साल का लड़का हूँ। कहानी शुरू करने से पहले बता दूँ कि यह अन्तर्वासना पर मेरी पहली और सच्ची कहानी हैं। इस घटना से पहले मैंने किसी लड़की के साथ सेक्स नहीं किया था। मुझे नहीं मालूम था कि मुझे मेरा पहले सेक्स के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। मैं बहुत शर्मीला था मगर मेरे चरित्र में बदलाव किस तरह हुआ वो मैं बताने जा रहा हूँ।
हमारा खानदान बहुत बड़ा है, मेरे पापा की 5 बहनें हैं जिनमें से तीन दिल्ली में ही रहती हैं। कहानी तब की हैं जब मैं बी टेक के तीसरे वर्ष में था। मेरी बड़ी बुआ के लड़के की शादी थी, मेरी सबसे छोटी बुआ की लड़की चित्रा भी आई थी, उम्र 18 साल, गोरा बदन, सेक्सी, लंबाई 5 फीट 6 इंच और उसके मम्में करीब 34 और गांड 36 की होगी। चित्रा 20 से कम की नहीं लगती थी।
शादी के घर में भीड़ की वजह से बुआ और चित्रा हमारे घर पर रुकी। शादी को अभी चार दिन बाकी थे मगर शादी के घर में कितने काम होते हैं यह तो हम सभी जानते हैं।
इसलिए मम्मी बुआ के घर मदद के लिए सुबह ही चली जाती थी और मेरी बहन स्वाति भी जॉब पर चली जाती थी। मेरी बहन खुद खूबसूरत जिस्म की मालकिन है वो 24 साल की है कोई भी उसे देख ले तो चोदे बिना ना छोड़े ! उसका पूरा बदन कसा हुआ है।
मेरा भाई-भाभी भी जॉब पर चले जाते थे और घर में मैं और चित्रा बचते थे मगर फिर भी मेरी चित्रा से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी क्योंकि तब मैं थोड़ा शर्मीला था।
एक दिन की बात हैं मैं और चित्रा घर पर अकेले थे तभी एक सेल्सगर्ल ने दरवाजा खटकाया।
मैंने दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि वो ब्रा बेचने के लिए आई थी।
उसने कहा- घर में कोई लेडी है?
मैंने मना किया, तभी चित्रा आई और बोली- रुको मुझे खरीदनी है !
मगर उसको पसंद नहीं आई और उसने मुझे शाम को उसके साथ मार्केट चलने को कहा तो मैंने हाँ कर दी।
बाज़ार में सबसे पहले हमने कुछ खाया फिर उसने कहा कि उसे ब्रा-पैंटी खरीदनी है।
फिर हमने शॉपिंग की और भी काफी सामान खरीदा। घर आते-आते शाम के छः बज गए। जब हम घर पहुँचे तो भाई घर पर पहले से था। भाई थोड़ा थका हुआ था तो जाकर सो गया। चित्रा भी अपने कमरे में चली गई और मैं टीवी देखने लग गया।
थोड़ी देर में किसी ने मुझे पीछे से आवाज लगाई, मैंने मुड़ कर देखा तो वो चित्रा थी, वो बोली- मैं कैसी लग रही हूँ?
चित्रा सिर्फ ब्रा-पैंटी पहने थे और वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी। उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया मगर वो मेरी बुआ की लड़की थी इसलिए मैंने अपने आप को रोक लिया और उससे
कपड़े पहन कर आने के लिए कहा।
रात को मेरे ख़यालों में सिर्फ चित्रा और उसके चूचे घूम रहे थे और हाथ अपने आप पैंट के अंदर जा रहा था।
मैं उठा और चित्रा के कमरे की ओर बढ़ा। मैंने देखा कि चित्रा वहाँ नहीं थी और उसकी ब्रा वहाँ पड़ी थी। मैंने उसे उठाया और अपने कमरे में ले जाकर ब्रा लंड पर रख कर चित्रा के नाम की मुठ मारने लगा।
मैं मुठ मार रहा था, इतने में पीछे से आवाज़ आई। मैं मुड़ा तो देखा तो चित्रा थी।
मुझे अपनी हरकत पर शर्म आ रही थी और मैं एक बुत की तरह वहीं खड़ा रहा। चित्रा अंदर आई और चादर लेकर बिना कुछ कहे चली गई।
अगले दिन मैं चित्रा से नजर नहीं मिला पा रहा था, मैंने माफी मांगने की सोची।
जब सब चले गए तो मैं चित्रा के कमरे में गया। चित्रा ने काले रंग का सूट पहना था। मैं कुछ कहता इससे पहले चित्रा ने कहा- मैं तुमसे प्यार करती हूँ !
और यह कह कर उसने मुझे गले लगा लिया।
मैं भी सब कुछ भूल गया और चित्रा को चूमने लगा। आज मेरा भी सपना सच हो गया मैं कब से उसे ख्यालों में चोद रहा था, कब से उसके नाम की मुठ मार रहा था, आज वो चूत मेरी होने वाली थी। थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज़ चलने लगी।
मैंने अपने एक हाथ से उसके चूचे मसलने चालू कर दिए और दूसरे हाथ से सलवार के ऊपर से उसके चूतड़ दबाने लगा। फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी के अंदर हाथ डालकर उसकी चूत सहलाने लगा।
वो सिसकारियाँ लेने लगी और साथ में हल्का सा विरोध भी कर रही थी।
फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और पंद्रह मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। फिर उसके बाद मैंने उसका कुर्ता उतार दिया और फिर ब्रा भी उतार दी।
उसके चुचे ऐसे लग रहे थे जैसे दो रसदार संतरे !!
मैंने उसके एक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसलना शुरू कर दिया। उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिर उसने मेरी पैंट खोलकर मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड को दबाने लगी।
मुझे लगा जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया। इतने में मैंने उसकी पैंटी नीचे सरका दी। उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के सामने खड़े थे। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे।
फिर मैंने चित्रा को अपनी बाहों में समेटा और उसे बिस्तर पर लिटा दिया और जीभ से उसकी चूत चाटने लगा वो तो जैसे पागल हो उठी।
वो बोली- भैया, मुझे भी आपका लंड चूसना है !
उसके बाद हमदोनों 69 की अवस्था में आ गए। हम दोनों पंद्रह मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और हम दोनों एक एक करके झड़ गए। फिर हम एक दूसरे के ऊपर लेट गए। थोड़ी देर में हम फिर गर्म हो गए और मैं फिर उसके चूचे चूसने लगा तो वो बोली- भैया, रहा नहीं जाता अपना लंड अंदर डाल दो !
उसकी चूत कुंवारी थी और मैं उसको दर्द नहीं पहुंचाना चाहता था इसलिए मैंने थोड़ी वेसलिन लेकर उसकी चूत की मालिश कर दी।
मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।
उसके बाद मैंने अपना लंड चित्रा की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अंदर करने लगा पर अंदर जा ही नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी चूत कुँवारी थी। मैंने हल्का सा धक्का लगाया तो वो तड़प गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई। मेरे लंड का सुपारा अंदर जा चुका था। फिर मैंने हल्के-हल्के अंदर डालना चालू किया और बीच-बीच में हल्का धक्का भी मार देता जिससे उसकी चीख निकल जाती। उसकी चूत बहुत कसी हुई थी। अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था फिर मैं हल्के हल्के अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा।
शुरू में तो उसे थोड़ा दर्द हुआ फिर वो भी मेरा साथ देने लगी। हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद ले रहे थे।
फिर हम दोनों बीस मिनट तक चुदाई का आनंद लेते रहे और फिर वो झड़ गई। मैं भी बस झड़ने वाला था फिर हम दोनों ने एक-दूसरे को कस के पकड़ किया और फिर अपना अपना पानी एक दूसरे में मिला दिया और उसके बाद हम एक-दूसरे में समा गए।
हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद बाथरूम में जा कर एक-दूसरे को साफ किया। हम लोग उस वक़्त भी बिल्कुल नंगे थे। एक दूसरे को साफ करते वक़्त मैंने उसे कई बार चूमा भी जिससे मेरा लंड फिर खड़ा हो गया, मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और वो उसे दस मिनट तक चूसती रही। फिर हम दोनों नंगे ही बाहर आ गए।
मैंने बाहर आकर देखा तो स्वाति दीदी बिस्तर पर बैठी थी।
मैं अपने लंड को एक कपड़े से छुपाने लगा। दीदी ने आकर मुझे एक तमाचा मार दिया और बोली- यह क्या कर रहे थे।
तब चित्रा ने स्थिति को संभालते हुए कहा- मैंने कहा था ! हम आगे से ऐसा कुछ दोबारा नहीं करेंगे।
तब कहीं जाकर दीदी शांत हुई और मैं वापिस अपने कपड़े पहनने लगा तो दीदी बोली- अपनी दीदी की आग शांत नहीं करेगा?
यह कह कर दीदी मुझे चूमने लगी और चित्रा यह सब देखती रही मगर मैंने कहा- दीदी, मम्मी आने वाली है। हम दोनों तो कभी भी कर सकते हैं।
मैंने दीदी की चूत और चित्रा की गांड कैसे मारी, यह मैं अगली कहानी में बताऊँगा।

चित्रा के साथ सेक्स करते हुए पकड़े जाने के बाद दीदी की आग शांत करने की जिमेदारी मेरे मजबूत लौड़े पर आ गई। मगर शादी की वजह से भैया-भाभी ने ऑफिस से छुट्टी ले ली तो कोई मौका नहीं मिल रहा था। मगर कहते है न जहाँ चाह वहाँ राह।
शादी से दो दिन पहले सभी मंदिर गए थे। मगर दीदी के सर में दर्द था इसलिए दीदी घर पर ही रुक गई। जैसा कि मैंने पहले भाग में बताया था, दीदी बहुत ही सेक्सी है, एक दम गोरा रंग, कसा हुआ शरीर, तनी हुई चूचियाँ जो बड़ी थी। दीदी की चूचियों को देखते ही मेरा लंड सलामी देने लगता था। मैं पहले भी कई बार दीदी के नाम की मुठ मार चुका था मगर मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी मस्त चूत का मैं कभी राजा बनूँगा।
सभी के जाने के बाद मैं दीदी के कमरे की तरफ बढ़ा मगर तबीयत खराब होने की वजह से दीदी सोई हुई थी। उन्हें सोया देखकर मैं वापिस अपने कमरे में आ गया और अपनी किस्मत को कोसने लगा। मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और दीदी के नाम की मुठ मारने लगा।
थोड़ी देर के बाद सभी घर वापिस आ गए।
मैंने मम्मी से कहा- मैं अपने दोस्त के घर जा रहा हूँ !
तो चित्रा ने साथ चलने को कहा। मैं चित्रा की शरारत समझ गया और मैंने भी हाँ कह दी।
मैंने अपने और चित्रा के सेक्स के बारे में अपने दोस्त योगेंद्र को पहले ही बता दिया था। हम सभी उसे योगी कहते थे। वो भी आज इंजीनियर है हम दोनों एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाते। जब मैं उसके घर पहुँचा तो योगी के अलावा उसके घर में कोई और नहीं था। वैसे योगी के घर में उसके माता-पिता के अलावा उसकी दो बहनें भी हैं।
योगी के घर पहुँचने के बाद हम तीनों बात करने लगे। योगी चित्रा की तारीफ करने लगा, वैसे योगी एक नंबर का ठर्की है। फिर उसने हमें बीयर पेश की। चित्रा ने मना किया मगर मेरे कहने पर चित्रा ने हाँ कह दी। चित्रा को थोड़ी चढ़ने लगी जिसके कारण वो अंगड़ाई लेने लगी जिससे चित्रा के चूचों की गोलाई साफ-साफ दिखने लगी जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया।
मैंने योगी की तरफ देखा तो उसका लंड भी साँप की तरह खड़ा था।
फिर मैंने चित्रा को देखा और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिये और उसे बाहों में उठा कर योगी के कमरे में ले गया।
योगी भी पीछे-पीछे आ गया, मैंने उसका सूट उतार दिया और फिर उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और फिर मैंने चित्रा की पैंटी भी निकाल दी और उसकी चूत चाटने लगा। फिर योगी भी उसके होंठ चूमने लगा मगर चित्रा ने योगी का भी कोई विरोध नहीं किया।
फिर मैंने अपना मोबाइल निकाला और योगी को बिना बताए चित्रा और योगी की फोटो खींच ली। योगी तो चित्रा को चूमने में लगा हुआ था। अब चित्रा पूरे होश में थी और वो हमारा पूरा साथ दे रही थी शायद वो भी दो-दो लंड का मजा एक साथ लेना चाहती थी। फिर योगी उसके चूचे चूसने लगा और मैंने अपना लंड चित्रा के मुँह में डाल दिया।
फिर मैंने योगी को हटाया और चित्रा को घोड़ी बनने के लिए कहा और अपना लंड उसकी गांड पर रख कर रगड़ने लगा। इतने में योगी ने अपना लंड चित्रा के मुँह में रख दिया। चित्रा पहली बार गांड मरवा रही थी इसलिए मैंने पहले उसकी गांड पर क्रीम की मालिश की और फिर उसकी गांड में हल्का सा धक्का दिया तो वो चिल्लाने की कोशिश करने लगी मगर योगी का लंड उसके मुंह में था इसलिए वो चिल्ला भी नहीं सकी।
फिर मैं धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा और बीच-बीच में हल्के धक्के मार देता जिससे उसकी चीख निकल जाती। मैं तीस मिनट तक उसकी गांड मारता रहा। इतनी देर में वो दो बार झड़ गई। जैसे ही मैं झड़ने वाला था मैंने अपना लंड निकाल और पूरा पानी उसके मुँह में डाल दिया।
फिर हम तीनों बिस्तर पर लेट गए। हम पंद्रह मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे फिर मैंने अपने होंठ फिर से चित्रा के होंठों पर रख दिये। उसके बाद हम बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को साफ करने लगे। फिर हम तीनों नंगे ही बाहर आ गए तो योगी ने चित्रा को पकड़ लिया और चित्रा के चूचे चूसने लगा। उसने चित्रा को बाहों में लेकर उसे बिस्तर पर लिटा दिया तो चित्रा बोली- अभी मैं थक गई हूँ !
मगर योगी ने उसकी एक नहीं सुनी और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया तो वो दर्द के मारे चिल्ला उठी।
योगी पंद्रह मिनट तक उसकी चूत मारता रहा। फिर वो दोनों जाकर नहाये और फिर हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और मैं और चित्रा वापिस घर आने लगे।
तभी चित्रा ने योगी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और थेंक-यू कहा और फिर हम दोनों वापिस घर आ गए।
चित्रा और मैं काफी थक गए थे इसलिए हम दोनों मेरे कमरे में जाकर एक ही बिस्तर पर सो गए। जब मैं सो कर उठा तो देखा चित्रा वहाँ नहीं थी।
मैं उठा और चित्रा के कमरे की तरफ बढ़ा मगर चित्रा के कमरे का दरवाजा बंद था और अंदर से आवाजें आ रही थी। मैंने ध्यान से सुना तो चित्रा किसी से बात कर रही थी।
मैं सुनने के लिए दरवाजे के बिल्कुल पास आ गया तो यह कोई और नहीं बल्कि स्वाति दीदी थी।
मैं वापिस अपने कमरे में आ गया क्योंकि मुझे अब स्वाति दीदी का कोई डर नहीं था। मैं फ्रेश होने के बाद नीचे आ गया तो स्वाति दीदी और चित्रा पहले से ही नीचे थी। चित्रा ने सूट और स्वाति दीदी ने काले रंग की साड़ी पहन रखी थी। उस साड़ी में दीदी क्या कयामत लग रही थी।
थोड़ी देर में मुझे किसी की मिस कॉल आई मैंने देखा तो वो स्वाति दीदी की थी। मुझे समझते देर न लगी और मैंने रिटर्न कॉल की तो दीदी ने फोन नहीं उठाया।
मैं सीधा दीदी के कमरे की ओर बढ़ा। मैंने दरवाजे को हाथ लगाया तो दरवाजा खुला हुआ था। मैं अंदर गया तो दीदी अंदर थी, उन्होंने लाल रंग की पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी। उनकी लाल रंग की ब्रा और पैंटी उस नाइटी में से साफ दिखाई दे रही थी।
मैंने दरवाजा बंद किया और अंदर आ गया। दीदी मेरे ऊपर टूट पड़ी और मेरी टी-शर्ट और बनियान उतार दी और मेरी छाती पर जीभ फेरने लगी।
मैंने भी देर न करते हुए दीदी के होंठो पर अपने होंठ रख दिये और हम दोनों पंद्रह मिनट तक एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने दीदी की नाइटी उतार दी और ब्रा के ऊपर से ही उनके चूचे मसलने लगा जिससे दीदी मचल उठी। मैंने दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया और अपना मुँह दीदी के होंठो से हटा कर उनके चूचे चूसने लगा।
हमें किसी का ड़र नहीं था क्योंकि रात का समय था और ज़्यादातर लोग सो चुके थे।
दीदी ने जोश में आते हुए मेरी पैंट और अंडरवीयर उतार दी और मेरा लंड दबाने लगी। मैंने भी स्वाति दीदी की पैंटी निकाल दी और उनको बाहों में लेकर उन्हें चूमने लगा जिससे उन्हें भी जोश आ गया और वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी।
फिर मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी चूत चाटने लगा जिससे वो सिहर उठी। मैंने आव देखा न ताव, अपना लंड दीदी के मुँह में रख दिया और फिर दीदी उसे लोलीपॉप की तरह चूसने लगी और हम 69 की अवस्था में आ गए। हम पंद्रह मिनट तक एक दूसरे को चाटते रहे और फिर मैंने अपना लंड दीदी की चूत पर रख दिया।
मेरी दीदी पहली बार किसी से चुदने वाली थी इसलिए मैं धीरे धीरे धक्का मारने लगा। जैसे ही मैं धक्का मारता, दीदी चिल्ला उठती। हमारा चुदाई कार्यक्रम बीस मिनट तक चला। इतने में दीदी दो बार झड़ गई, मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने धक्के मारना तेज़ कर दिया। दीदी को भी अब मजा आ रहा था। फिर मैं भी झड़ गया और हमारा पानी एक-दूसरे में मिल गया। फिर हम दोनों एक-दूसरे के ऊपर लेट गए, हम काफी देर तक वैसे ही लेटे रहे और हम एक दूसरे को चूमते रहे जिससे दीदी फिर से गर्म हो गई और मेरा लंड भी फिर खड़ा हो गया।
मैंने फिर से दीदी को चोदा। उस रात मैंने उन्हें चार बार चोदा। हम सुबह तक एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे। सुबह किसी ने दरवाजा खटकाया तो हम डर गए। मैंने खिड़की में से देखा तो वो चित्रा थी। चित्रा को सब पता था इसलिए वो चली गई और फिर मैं और दीदी उसके बाद बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को साफ करने लगे। दीदी अपने चूचों पर पानी डाल-डाल कर साफ कर रही थी जिसे देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने दीदी को बाहों में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया एक बार फिर उनकी चुदाई की।
फिर मैंने दीदी से कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है !
तो दीदी ने कहा- अभी नहीं ! सुबह हो चुकी है, कोई भी आ सकता है। और मेरे भैया राजा, अब तो मैं पूरी तुम्हारी हूँ, कभी भी मार लेना ! और अब मुझे अकेले में दीदी नहीं डार्लिंग बोला करो।
फिर हमने एक-दूसरे को एक लंबा चुंबन दिया और कपड़े पहन कर नीचे आ गए।
आप मुझे मेल करके बताइये आपको मेरी कहानी कैसी लगी।

सुबह नीचे आने के बाद मुझे बहुत ग्लानि महसूस हो रही थी कि मैंने अपनी बहन के साथ सेक्स किया मगर मुझे रह-रह कर उसकी उसकी मस्त चूचियों की चुसाई और उसकी चूत की खुशबू भी याद आती। मैं फिर अपने कमरे में वापिस चला गया। तभी दीदी मेरे कमरे में आई तो मैं वहाँ से उठ कर जाने लगा। तभी उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये जिससे मेरी बची हुई शर्म भी चली गई और मैं भी उनके होंठ चूसने लगा।
पाँच मिनट तक एक-दूसरे के होंठ चूसने के बाद दीदी उठी और वहाँ से जाने लगी तो मैंने उन्हें पकड़ लिया तो वो मुझसे बिल्कुल चिपक गई जैसे एक साँप चन्दन के पेड़ से चिपकता हैं और मैं फिर से उनके होंठो का रसपान करने लगा।
मगर फिर मम्मी की आवाज़ आई और दीदी नीचे चली गई।
उसके बाद शादी की वजह से मैं और दीदी दो दिनों तक सही से एक-दूसरे से बात भी नहीं कर पाये। खैर किसी तरह शादी निपट गई और चित्रा भी अपने घर चली गई। अब दीदी सुबह ही अपनी जॉब पर निकल जाती और शाम को लेट आती इसलिए मेरे लिए उनके पास कोई वक़्त नहीं बचता था और रविवार को सभी घर पर होते थे।
शनिवार था, मेरी कॉलेज की छुट्टी थी इसलिए मैं घर पर अपने कमरे में बैठा था तभी मम्मी की आवाज़ आई।
मैं नीचे गया तो मम्मी ने एक फ़ाइल मुझे देते हुए मुझे कहा- स्वाति यह फ़ाइल भूल गई है, उसका फोन आया है, तू जाकर यह फ़ाइल उसे उसके ऑफिस में दे आ।
मैंने फ़ाइल उठाई और ऑफिस चल दिया। दीदी का ऑफिस काफी दूर था इसलिए मैं कार ले गया। मैं ऑफिस पहुंचा तो चपरासी ने कहा- मैडम बॉस के साथ मीटिंग में हैं ! आप इंतज़ार कीजिये।
मगर मुझे घर जाने कि जल्दी थी इसलिए मैं स्वाति के बॉस के कैबिन की तरफ बढ़ गया। मैंने कैबिन का दरवाजा खोलना चाहा तो दरवाजा नहीं खुला, शायद दरवाजा अंदर से बंद था। मैंने खिड़की से झांक कर देखा तो मैं दंग रह गया क्योंकि अंदर दीदी बॉस की बाहों में थी और उनके तन पर कपड़े के नाम पर सिर्फ पैंटी थी और उनका बॉस उनके चूचे चूस रहा था।
दीदी के बॉस का नाम श्यामलाल था और उनकी उम्र 48 थी मगर फिर भी वो काफी जवान दिख रहा था। यह देख कर मेरी आँखों से आंसू आ गए और मैं वापिस दीदी के कैबिन में आ गया।
थोड़ी देर के बाद दीदी वापिस अपने कैबिन में आई, मुझे देख कर बोली- तू इतनी जल्दी कैसे आ गया?
मैंने कहा- मैं कार से आया हूँ।
उनके पीछे उनका बॉस श्यामलाल आया और चपरासी से तीन चाय कह कर मुझे और दीदी को अपने कैबिन में बुलाया।
हम सब बैठ कर बात कर रहे थे। तभी कंपनी का मैनेजर अब्दुल आया और कोई फ़ाइल दीदी के बॉस को दी और फिर मुझे देख कर चला गया।
चाय पीने के बाद मैं कंपनी के गेट से निकला तो मुझे याद आया कि मैं अपनी चाभी तो दीदी के बॉस के कमरे में छोड़ आया। मैं चाभी लेने के लिए वापिस मुडा और दीदी के बॉस के कमरे की तरफ बढ़ा। मैंने दरवाजा खोलना चाहा तो दरवाजा फिर से बंद था।
मुझे समझते देर न लगी और मैंने खिड़की से झाँका तो मैंने जो सोचा था उससे ज्यादा देखने को मिला। दीदी का बॉस श्यामलाल और कंपनी का मैनेजर अब्दुल दोनों मेरी बहन को बड़ी बेदर्दी से चोद रहे थे और मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। मगर मैं अंदर भी नहीं जा सकता था और मैं वहाँ खड़ा रह कर देख भी नहीं सकता था क्योंकि मेरी कार की चाभी अंदर थी। फिर मैंने अपना मोबाइल निकाला और दीदी की उसके बॉस और कंपनी के मैनेजर के साथ फोटो खींच लिए।
तभी मैनेजर उठा और कपड़े पहनने लगा मुझे लगा कि शायद दीदी का चुदाई कार्यक्रम खत्म हो गया। मगर दीदी का बॉस रुक नहीं रहा था और दीदी की चूत का भोसड़ा बनाने में लगा था। श्यामलाल अपना जोशीला लंड दीदी की चूत से निकालने को ही तैयार ही नहीं था।

3 Aug 2012

मासूम गौरी चुद गई

मैं अपने घर में एकलौती लड़की हूँ। लाड़ प्यार ने मुझे जिद्दी बना दिया था। बोलने में भी मैं लाड़ के कारण तुतलाती थी। मैं सेक्स के बारे में कम ही जानती थी। पर हां कॉलेज तक आते आते मुझे चूत और लण्ड के बारे में थोड़ा बहुत मालूम हो गया था। मेरी माहवारी के कारण मुझे थोड़ा बहुत चूत के बारे में पता था पर कभी सेक्स की भावना मन में आई ही नहीं। लड़को से भी मैं बातें बेहिचक किया करती थी। पर एक दिन तो मुझे सब मालूम पड़ना ही था।आज रात को जैसे ही मैंने अपना टीवी बन्द किया, मुझे मम्मी पापा के कमरे से एक अनोखी सी आवाज आई। मैंने बाहर निकल कर अपने से लगे कमरे की तरफ़ देखा तो लाईट जल रही थी पर कमर सब तरफ़ से बन्द था। मैं अपने कमरे में वापस आ गई। मुझे फिर वही आवाज आई। मेरी नजर मेरे कमरे से लगे हुये दरवाजे पर टिक गई। मैंने परदा हटाया तो बन्द दरवाजे में एक छेद नजर आया, जो नीचे था। मैंने झुक के कमरे में देखने की कोशिश की। एक ही नजर में मुझे मम्मी पापा दिख गये। वे नंगे थे और कुछ कर रहे थे।मैंने तुरन्त कमरे की लाईट बन्द की और फिर उसमें से झांकने लगी। पापा के चमकदार गोल गोल चूतड़ साफ़ नजर आ रहे थे। सामने बड़ी सी उनकी सू सू तनी हुई दिख रही थी। पापा के चूतड़ कितने सुन्दर थे, उनका नंगा शरीर बिल्कुल किसी हीरो … नहीं ही-मैन … नहीं सुपरमैन… की तरह था। मैं तो पहली नजर में ही पापा पर मुग्ध हो गई। पापा की सू सू मम्मी के चूतड़ो में घुसी हुई सी नजर आ रही थी। पापा बार बार मम्मी के बोबे दबा रहे थे, मसल रहे थे। मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया। झुक कर बस देखती रही… हां, मम्मी को इसमें आनन्द आ रहा था और पापा को भी बहुत मजा आ रहा था। कुछ देर तक तो मैं देखती रही फिर मैं बिस्तर पर आ कर लेट गई। सुना तो था कि सू सू तो लड़कियों की सू सू में जाती है… ये तो चूतड़ों के बीच में थी। असमन्जस की स्थिति में मैं सो गई।दूसरे दिन मेरा चचेरा भाई चीकू आ गया। मेरी ही उम्र का था। उसका पलंग मेरे ही कमरे में दूसरी तरफ़ लगा दिया था। सेक्स के मामले में मैं नासमझ थी। पर चीकू सब समझता था। रात को हम दोनों मोबाईल से खेल रहे थे… कि फिर से वही आवाज मुझे सुनाई दी। चीकू किसी काम से बाहर चला गया था। मैंने भाग कर परदा हटा कर छेद में आंख लगा दी। पापा मम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे और अपने चूतड़ को आगे पीछे कर के रगड़ रहे थे। इतने में चीकू आ गया…”क्या कर रही है गौरी… ?” चीकू ने धीरे से पूछा।”श श … चुप… आजा ये देख… अन्दर मम्मी पापा क्या कर रहे हैं?” मैंने मासूमियत से कहा।”हट तो जरा … देखूँ तो !” और चीकू ने छेद पर अपनी आंख लगा दी। उसे बहुत ही मजा आने लगा था।”गौरी, ये तो मजे कर रहे हैं … !” चीकू उत्सुकता से बोला।पजामे में भी चीकू के चूतड़ भी पापा जैसे ही दिख रहे थे। अनजाने में ही मेरे हाथ उसके चूतड़ों पर पहुंच गये और सहलाने लगे।”अरे हट, ये क्या कर रही है… ?” उसने बिना मुड़े छेद में देखते हुये मेरे हाथ को हटाते हुये कहा।”ये बिल्कुल पापा की तरह गोल गोल मस्त हैं ना… !” मैंने फिर से उसके चूतड़ों पर हाथ फ़ेरा। मैंने अब हाथ नीचे ले जाते हुये पजामें में से उसका लण्ड पकड़ लिया… वो तो बहुत कड़ा था और तना हुआ था… !”चीकू ये तो पापा की सू सू की तरह सीधा है… !”वो एक दम उछल सा पड़ा…”तू ये क्या करने लगी है … चल हट यहां से… !” उसने मुझे झिड़कते हुये कहा।पर उसका लण्ड तम्बू की तरह उठा हुआ था। मैंने फिर से भोलेपन में उसका लण्ड पकड़ लिया…”पापा का भी ऐसा ही है ना मस्त… ?” मैंने जाने किस धुन में कहा। इस बार वो मुस्करा उठा।”तुझे ये अच्छा लगता है…? ” चीकू का मन भी डोलने लगा था।”आप तो पापा की तरह सुपरमैन हैं ना… ! देखा नहीं पापा क्या कर रहे थे… मम्मी को कितना मजा आ रहा था… ऐसे करने से मजा आता है क्या… ” मेरा भोलापन देख कर उसका लण्ड और कड़क गया।”आजा , वहाँ बिस्तर पर चल… एक एक करके सब बताता हूँ !” चीकू ने लुफ़्त उठाने की गरज से कहा। हम दोनों बिस्तर पर बैठ गये… उसका लण्ड तना हुआ था।”इसे पकड़ कर सहला… !” उसने लण्ड की तरफ़ इशारा किया। मैंने बड़ी आसक्ति से उसे देखा और उसका लण्ड एक बार और पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी। उसके मुख से सिसकारी निकल पड़ी।”मजा आ रहा है भैया… ?”उसने सिसकारी भरते हुये हां में सर हिलाया,”आ अब मैं तेरे ये सहलाता हूँ… देख तुझे भी मजा आयेगा… !” उसने मेरी चूंचियों की तरफ़ इशारा किया।मैंने अपना सीना बाहर उभार दिया।


मेरी छोटी छोटी दोनों चूंचियां और निपल बाहर से ही दिखने लगे।उसने धीरे से अपना हाथ मेरी चूंचियों पर रखा और दबा दिया। मेरे शरीर में एक लहर सी उठी। अब उसके हाथ मेरी पूरी चूंचियों को दबा रहे थे, मसल रहे थे। मेरे शरीर में वासना भरी गुदगुदी भरने लगी। लग रहा था कि बस दबाते ही रहे। ज्योंही उसने मेरे निपल हल्के से घुमाये, मेरे मुँह से आनन्द भरी सीत्कार निकल गई।”भैया, इसमें तो बड़ा मजा आता है… !”"तो मम्मी पापा यूँ ही थोड़े ही कर रहे हैं… ? मजा आयेगा तभी तो करेंगे ना… ?”"पर पापा मम्मी के साथ पीछे से सू सू घुसा कर कुछ कर रहे थे ना… उसमें भी क्या… ?”"अरे बहुत मजा आता है … रुक जा… अभी अपन भी करेंगे… देख कैसा मजा आता है !”"देखो तो पापा ने अपनी सू सू मेरे में नहीं घुसाई… बड़े खराब हैं … !”"ओह हो… चुप हो जा… पापा तेरे साथ ये सब नहीं कर सकते हैं … हां मैं हूँ ना !”"क्या… तुझे आता है ये सब… ? फिर ठीक है… !”"अब मेरे लण्ड को पजामे के अन्दर से पकड़ और फिर जोर से हिला… “”क्या लण्ड … ये तो सू सू है ना… लण्ड तो गाली होती है ना ?”"नहीं गाली नहीं … सू सू का नाम लण्ड है… और तेरी सू सू को चूत कहते हैं !”मैं हंस पड़ी ऐसे अजीब नामों को सुनकर। मैंने उसके पजामे का नाड़ा खोल दिया और पजामा नीचे करके उसका तन्नाया हुआ लण्ड पकड़ लिया और कस कर दबा लिया।”ऊपर नीचे कर … आह हां … ऐसे ही… जरा जोर से कर… !”मैं लण्ड उसके कहे अनुसार मसलती रही… और मुठ मारती रही।”गौरी, मुझे अपने होंठो पर चूमने दे… !”उसने अपना चेहरा मेरे होंठो से सटा दिया और बेतहाशा चूमने लगा। उसने मेरा पजामा भी नाड़ा खोल कर ढीला कर दिया… और हाथ अन्दर घुसा दिया। उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया। मेरा सारा जिस्म पत्ते की तरह कांपने लगा था। सारा शरीर एक अद्भुत मिठास से भर गया था। ऐसा महसूस हो रहा था कि अब मेरे साथ कुछ करे। मेरे में समां जाये… … शायद पापा की तरह लण्ड घुसा दे… ।उसने जोश में मुझे बिस्तर पर धक्का दे कर लेटा दिया और मेरे शरीर को बुरी तरह से दबाने लगा था। पर मैंने अभी तक उसका लण्ड नहीं छोड़ा था। अब मेरा पजामा भी उतर चुका था। मेरी चूत पानी छोड़ने लगी थी। पर मस्ती में मुझे यह नहीं मालूम था कि चूत चुदने के लिये तैयार हो चुकी थी। मेरा शरीर लण्ड लेने के लिये मचल रहा था।अचानक चीकू ने मेरे दोनों हाथ दोनों तरफ़ फ़ैला कर पकड़ लिये और बोला,”गौरी, मस्ती लेनी हो तो अपनी टांगें फ़ैला दे… !”मुझे तो स्वर्ग जैसा मजा आ रहा था। मैंने अपनी दोनों टांगें खोल दी… उससे चूत खुल गई। चीकू मेरे ऊपर झुक गया और मेरे अधरों को अपने अधर से दबा लिया… उसका लण्ड चूत के द्वार पर ठोकरें मार रहा था। उसके चूतड़ों ने जोर लगाया और लण्ड मेरी चूत के द्वार पर ही अटक कर फ़ंस गया। मेरे मुख से चीख सी निकली पर दब गई। उसने और जोर लगाया और लण्ड करीब चार इंच अन्दर घुस गया। मेरा मुख उसके होंठो से दबा हुआ था। उसने मुझे और जोर से दबा लिया और लण्ड का एक बार फिर से जोर लगा कर धक्का मारा … लण्ड सब कुछ चीरता हुआ, झिल्ली को फ़ाड़ता हुआ… अन्दर बैठ गया।मैं तड़प उठी। आंखों से आंसू निकल पड़े। उसने बिना देरी किये अपना लण्ड चलाना आरम्भ कर दिया। मैं नीचे दबी कसमसाती रही और चुदती रही। कुछ ही देर में चुदते चुदते दर्द कम होने लगा और मीठी मीठी सी कसक शरीर में भरने लगी। चीकू को चोदते चोदते पसीना आ गया था। पर जोश जबरदस्त था। दोनों जवानी के दहलीज़ पर आये ही थे। अब उसके धक्के चलने से मुझे आनन्द आने लगा था। चूत गजब की चिकनी हो उठी थी। अब उसने मेरे हाथ छोड़ दिये थे … और सिसकारियाँ भर रहा था।मेरा शरीर भी वासना से भर कर चुदासा हो उठा था। एक एक अंग मसले जाने को बेताब होने लगा था। मुझे मालूम हो गया था कि मम्मी पापा यही आनन्द उठाते हैं। पर पापा यह आनन्द मुझे क्यों नहीं देते। मुझे भी इस तरह से लण्ड को घुसा घुसा कर मस्त कर दें … । कुछ देर में चीकू मुझसे चिपक गया और उसका वीर्य छूट गया। उसने तेजी से लण्ड बाहर निकाला और चूत के पास दबा दिया। उसका लण्ड अजीब तरीके से सफ़ेद सफ़ेद कुछ निकाल रहा था। मेरा यह पहला अनुभव था। पर मैं उस समय तक नहीं झड़ी थी। मेरी उत्तेजना बरकरार थी।”कैसा लगा गौरी…? मजा आता है ना चुदने में…? “”भैया लगती बहुत है… ! आआआआ… ये क्या…?” बिस्तर पर खून पड़ा था।”ये तो पहली चुदाई का खून है… अब खून नहीं निकलेगा… बस मजा आयेगा… !”मैं भाग कर गई और अपनी चूत पानी से धो ली… चादर को पानी में भिगो दी। वो अपने बिस्तर में जाकर सो गया पर मेरे मन में आग लगी रही। वासना की गर्मी मुझसे बर्दाश्त नहीं हुई। रात को मैं उसके बिस्तर पर जाकर उस पर चढ़ गई। उसकी नींद खुल गई…”भैया मुझे अभी और चोदो… पापा जैसे जोर से चोदो… !”"मतलब गाण्ड मरवाना है… !”"छीः भैया, गन्दी बात मत बोलो … चलो… मैंने अपना पजामा फिर से उतार दिया और मम्मी जैसे गाण्ड चौड़ी करके खड़े हो गई। चीकू उठा और तुरंत क्रीम ले कर आया और मेरी गाण्ड में लगा दी।”गौरी, गाण्ड को खोलने की कोशिश करना … नहीं तो लग जायेगी… ” मैंने हाँ कर दी।उसने लण्ड को मेरी गाण्ड के छेद पर लगाया और कहा,”गाण्ड भींचना मत … ढीली छोड़ देना… ” और जोर लगाया।एक बार तो मेरी गाण्ड कस गई, फिर ढीली हो गई। लण्ड जोर लगाने से अन्दर घुस पड़ा। मुझे हल्का सा दर्द हुआ… उसने फिर जोर लगा कर लण्ड को और अन्दर घुसेड़ा। चिकनाई से मुझे आराम था। लण्ड अन्दर बैठता गया।”हाय… पूरा घुस गया ना, पापा की तरह… ?” मुझे अब अच्छा लगने लगा था।”हां गौरी … पूरा घुस गया… अब धक्के मारता हूँ… मजा आयेगा अब… !”उसने धक्के मारने शुरू कर दिये, मुझे दर्द सा हुआ पर चुदने लायक थी। कुछ देर तक तो वो गाण्ड में लण्ड चलाता रहा। मुझे कुछ खास नहीं लगा, पर ये सब कुछ मुझे रोमांचित कर रहा था। पर वासना के मारे मेरी चूत चू रही थी।”चीकू, मुझे जाने कैसा कैसा लग रहा है… मेरी चूत चोद दे यार… !”चीकू को मेरी टाईट गाण्ड में मजा आ रहा था। पर मेरी बात मान कर उसने लण्ड मेरी चूत में टिका दिया और इस बार मेरी चूत ने लण्ड का प्यार से स्वागत किया। चिकनी चूत में लण्ड उतरता गया। इस बार कोई दर्द नहीं हुआ पर मजा खूब आया। तेज मीठा मीठा सा कसक भारा अनुभव। अब लगा कि वो मुझे जम कर चोदे। मम्मी इतना मजा लेती हैं और मुझे बताती भी नहीं हैं … सब स्वार्थी होते हैं … सब चुपके चुपके मजे लेते रहते हैं … । मैंने बिस्तर अपने हाथ रख दिये और चूत और उभार दी। अब मैं पीछे से मस्ती से चुद रही थी। मेरी चूत पानी से लबरेज थी। मेरे चूतड़ अपने आप ही उछल उछल कर चुदवाने लगे थे। उसका लण्ड सटासट चल रहा था… और … और… मेरी मां… ये क्या हुआ… चूत में मस्ती भरी उत्तेजना सी आग भरने लगी और फिर मैं उसे सहन नहीं कर पाई… मेरी चूत मचक उठी… और पानी छोड़ने लगी… झड़ना भी बहुत आनन्द दायक था।तभी चीकू के लण्ड ने भी फ़ुहार छोड़ दी… और उसका वीर्य उछल पड़ा। लण्ड बाहर निकाल कर वो मेरे साथ साथ ही झड़ता रहा। मुझे एक अजीब सा सुकून मिला। हम दोनों शान्त हो चुके थे।”चीकू… मजा आ गया यार… अब तो रोज ही ऐसा ही करेंगे … !” मैंने अपने दिल की बात कह दी।”गौरी, मेरी मासूम सी गौरी … कितना मजा आयेगा ना… अपन भी अब ऐसे ही मजे करेंगे… पर किसी को बताना नहीं… वर्ना ये सब बंद तो हो ही जायेगा… पिटाई अलग होगी…!”"चीकू … तुम भी मत बताना … मजा कितना आता है ना, अपन रोज ही मस्ती मारेंगे… “हम दोनों ही अब आगे का कार्यक्रम बनाने लगे।

इतनी-जल्दी-हो-गया

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